MP की स्वच्छता रैंकिंग पर कचरे का संकट, 15 शहरों की साख दांव पर

भोपाल
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के परिणामों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। पिछले वर्ष इन पुरस्कारों की घोषणा जुलाई में हो गई थी लेकिन इस बार अक्टूबर माह में होगी। मध्यप्रदेश के लगभग 15 शहर स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग की दौड़ में शामिल हैं। कचरा प्रबंधन की नियमानुसार व्यवस्था नहीं कर पाने से प्रदेश के कई शहरों की रैंकिंग बिगड़ सकती है। वहीं नागरिकों का फीडबैक भी निर्णायक रहेगा। दरअसल प्रदेश में प्रतिदिन निकलने वाला घरेलू कचरे की मात्रा बढ़ती जा रही है लेकिन प्रोसेसिंग की व्यवस्था नहीं है।
मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे नंबर
प्रदेश में एक साल में प्रतिदिन निकलने वाले घरेलू कचरे की मात्रा में 1730 टन बढ़ चुकी है। इसके साथ इस कचरे की प्रोसेसिंग में भी गैप बढ़ा है। एक साल पहले 18.05 टीपीडी कचरे की प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही थी जो अब बढ़कर 55.39 टन प्रतिदिन हो गई है। अभी भी 34 डंपिंग साइट्स पर लगभग 13 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट जमा है, जो शहरों की सूरत पर धब्बा बना हुआ है। स्वच्छ अवार्ड की रैंकिंग 12500 नंबरों पर होगी। इसमें से 1-1 हजार नंबर ओडीएफ और वाटर प्लस के साथ ही गार्बेज फ्री सिटी के लिए होंगे। बचे 10500 नंबर टीम के मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे। राजधानी भोपाल के साथ ही इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, सतना जैसे बड़े शहरों में भी कचरे के ऐसे पहाड़ दिखाई देते हैं।
धार्मिक स्थलों के साथ स्कूलों में भी सर्वे
स्वच्छ सर्वे की टीमों ने फरवरी-मार्च में प्रदेश के नगरीय निकायों में जाकर सर्वेक्षण का काम पूरा किया। इस बार टूरिस्ट, हेरिटेज, धार्मिक स्थलों के साथ अन्य ऐसे स्थानों की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया गया जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके साथ स्कूली बच्चों के व्यवहार में स्वच्छता शामिल हुई या नहीं, इसका भी स्कूलों में जाकर जायजा लिया गया। नई टूलकिट में खुले में शौच और यूरिनेशन रोकने का एक नया इंडिकेटर शामिल थे। टीमों ने निकायों में खुले में यूरिनेशन रोकने के लिए जरूरत के अनुसार व्यवस्था भी देखी।
स्वच्छ शहर जोड़ी में मिल सकता है लाभ
इस बार स्वच्छ शहर जोड़ी नाम से से एक नई अवार्ड कैटेगरी शुरू की गई है। इससे स्वच्छ शहर अपने समीपस्थ शहर को स्वच्छता सिखाकर जोड़ी में अवॉर्ड ले सकेंगे। प्रदेश के स्वच्छता में अव्वल शहरों को इसका लाभ मिल सकता है। क्योंकि पिछले वर्ष प्रदेश के आठ शहरों को अवॉर्ड मिला था। इनमें इंदौ, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर और ग्वालियर शामिल थे। इन शहरों के आसपास वाले नगरों के साथ जोड़ी में पुरस्कार आ सकता है।
स्वच्छता मानक के नंबर निर्धारित
1500- दिखाई देने वाली स्वच्छता
1000- कचरे का सेग्रीगेशन, संग्रहण और परिवहन
1500- सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग
1000- एक्सेस टू सेनिटेशन
1000- उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन
500- डीस्लजिंग सर्विसेज का मशीनीकरण
1500- स्वच्छता की एडवोकेसी
1000- इकोसिस्टम सशक्तिकरण
500- स्वच्छता कर्मियों का कल्याण
1000- सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण
10500- कुल नंबर











