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जोजिला सुरंग परियोजना को सेल ने पहुंचाया 31 हजार टन इस्पात, निर्माण को मिली मजबूती

रांची
 जम्मू-कश्मीर में बन रही देश की महत्वाकांक्षी जोजिला सुरंग परियोजना को मजबूती देने में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के मार्केटिंग विंग की अहम भूमिका रही है।

इसके समन्वय से परियोजना के लिए 31 हजार टन से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात की आपूर्ति समय पर कराई गई। इसमें टीएमटी री-बार, स्ट्रक्चरल स्टील और स्टील प्लेट्स शामिल हैं।

सेल के अनुसार, जोजिला सुरंग जैसी चुनौतीपूर्ण परियोजना में केवल इस्पात बनाना ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही जगह तक उसकी आपूर्ति कराना भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। रांची स्थित सेल कार्यालय ने इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए पूरी सप्लाई चेन का समन्वय किया, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हुआ।

देश की सबसे लंबी सुरंग, बर्फबारी में भी नहीं होगी बंद
यह सुरंग तैयार होने के बाद देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क सुरंग होगी। इसके शुरू होने से श्रीनगर और लेह के बीच पूरे साल सड़क संपर्क बना रहेगा। अभी हर साल भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद हो जाता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ सेना की आवाजाही भी प्रभावित होती है।

सुरंग निर्माण में इस्तेमाल किए गए इस्पात को कठिन मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सुरंग की मजबूती और सुरक्षा लंबे समय तक बनी रहेगी।

झारखंड के लिए भी बड़ी उपलब्धि
सेल अधिकारियों का कहना है कि देश की बड़ी आधारभूत और सामरिक परियोजनाओं में कंपनी लगातार अपनी भूमिका निभा रही है। रेलवे, मेट्रो, पुल, राजमार्ग और अब जोजिला सुरंग जैसी परियोजनाओं में सेल का इस्पात देश के विकास की मजबूत नींव बन रहा है।

रांची स्थित सेल मार्केटिंग आफिस की इस भूमिका को झारखंड के लिए भी उपलब्धि माना जा रहा है। देश की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक में यहां से किए गए समन्वय ने एक बार फिर साबित किया है कि रांची का यह कार्यालय केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

जोजिला सुरंग एक नजर में
जोजिला सुरंग देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क सुरंग है। इसके निर्माण से श्रीनगर और लेह के बीच पूरे वर्ष सड़क संपर्क संभव हो सकेगा, जिससे लद्दाख तक हर मौसम में आवाजाही आसान होगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 31 हजार टन से अधिक इस्पात का उपयोग किया गया है, जिसमें टीएमटी री-बार, स्ट्रक्चरल स्टील और स्टील प्लेट्स शामिल हैं। यह सुरंग न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगी।

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