‘क्लास 9 के छात्रों पर 3 भाषाएं न थोपें’… CBSE की भाषा नीति सुप्रीम कोर्ट पहुंची

नई दिल्ली
CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने मामले को जल्द सुनने की मांग रखी. वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले को बुधवार को सुनाई के लिए सूचीबद्ध किया था लेकिन बाद में इस केस को सूची से हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले में तुरंत सुनवाई की जरूरत है क्योंकि कई छात्र ऐसी भाषा पढ़ने को मजबूर हैं, जिसके लिए उनके स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
परेशान हैं छात्र
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कोर्ट को बताया कि बहुत से बच्चों को वह भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है जो उन्होंने चुनी थी. बच्चों के लिए किताबें और टीचर भी उपलब्ध नहीं हैं. यह क्लास 5-8 और क्लास 8-10 के लिए है. छात्र बिना किसी टीचर या किताबों के क्लासरूम में बैठे हैं।
बंगाल में भी नहीं हैं टीचर
उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कोलकाता में हिंदी, बंगाली और संस्कृत के विकल्प हैं, लेकिन उनके पास संस्कृत या हिंदी के टीचर नहीं हैं. उन्होंने आगे बताया कि यह फार्मूला 2030 में लागू होना था इसके तहत भाषा चुनाव के लिए 22 भाषाओं का विकल्प देना जरूरी है लेकिन ज़्यादातर स्कूलों में ये विकल्प नहीं हैं.इस पर जस्टिस बागची ने कहा भाषा चुनने का विकल्प क्लास 6 में होना चाहिए और वह विकल्प भी ऐसे होने चाहिए जो असल में संभव हो।
कोर्ट में की ये अपील
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि कोर्ट से हमारा आग्रह है कि जो थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का कंपल्शन क्लास नाइंथ के लिए है उसको हटा दिया जाए क्योंकि क्लास नाइंथ में आने वाले बच्चों के ऊपर बोर्ड का एक्स्ट्रा प्रेशर होता है. फिलहाल CJI ने आश्वासन दिया है कि कल इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है किया जा सकता है।











