बिहार सरकार के 100 दिन पूरे, 11 हजार करोड़ की योजनाओं का एलान

पटना
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर शनिवार को राजधानी पटना में राज्यस्तरीय विकास उत्सव का आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीआईटी मेसरा, पटना परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और राज्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए उद्योग, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कृषि और निवेश से जुड़े कई बड़े एलान किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 11,464 करोड़ रुपये की लागत वाली 2,476 विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव सहित कई मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
215 करोड़ के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम से पहले पूर्व राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल पहुंचकर 215 करोड़ रुपये की लागत से बने 400 बेड वाले अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक एवं न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, रेडियोलॉजी विभाग, स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, फिजियोथेरेपी, ट्रॉमा सेंटर और 24×7 आपातकालीन सेवाओं से लैस यह अस्पताल बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और मरीजों को राज्य से बाहर इलाज के लिए जाने की जरूरत कम होगी।
अधिकारियों से बोले- 12 नहीं, 15 घंटे काम करना होगा
बीआईटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करना है तो कार्य संस्कृति बदलनी होगी।
उन्होंने कहा, 'अब तक 10 से 12 घंटे काम करते थे, लेकिन बिहार को देश की विकास गति के साथ ले जाना है तो 12 से 15 घंटे काम करना होगा।'
15 अगस्त से रेफरल सिस्टम पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के मामले में बिहार देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में 101 अनुमंडलीय अस्पताल और 38 जिला अस्पताल कार्यरत हैं।
उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त से जिला एवं अनुमंडलीय अस्पताल सामान्य बीमारियों के मरीजों को बिना ठोस कारण के रेफर नहीं कर सकेंगे। यदि अनावश्यक रेफरल किया गया तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही उन्होंने अधिकारियों को अधिक से अधिक नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज खोलने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर पीपीपी मॉडल पर आयुर्वेद चिकित्सा संस्थानों की स्थापना का भी सुझाव दिया।
हर जिले में एक उद्योग लगाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब हर जिले में कम-से-कम एक बड़े उद्योग की स्थापना के लक्ष्य पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि 20 नवंबर को सरकार के एक वर्ष पूरे होने तक बिहार की धरती पर पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य का मौजूदा बजट लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये का है, लेकिन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है।
सरकार उद्योगों के लिए पीपीपी मॉडल पर जमीन उपलब्ध कराएगी ताकि परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके।
पीपीपी मॉडल पर सड़कें, 200 किमी होगी मरीन ड्राइव
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी संसाधनों से परियोजनाओं को पूरा करने में अधिक समय लगता है, इसलिए अब सड़क निर्माण में भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने घोषणा की कि पटना की मरीन ड्राइव को 200 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल शुल्क केवल व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े वाहनों एवं उपयोगकर्ताओं से लिया जाएगा।
गन्ना किसानों के लिए 25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बिहार में 20 चीनी मिलें संचालित होती थीं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सुझाव के बाद सरकार ने अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलों को शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने बताया कि सकरी रैयाम और सासामुसा चीनी मिलों का काम इसी वर्ष शुरू होगा, जिससे गन्ना किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
वैशाली और गया में बड़े निवेश की तैयारी
सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि वैशाली के राजापाकड़ में इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स हब स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में 20 से 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है और इससे करीब एक लाख युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान है।
इसके अलावा गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) के तहत समर्पित स्टील प्लांट विकसित करने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है।
नदियों के किनारे विकसित होंगे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बागमती और बूढ़ी गंडक को जोड़ने की पहल शुरू कर दी है। भविष्य में नारायणी और कोसी को भी विकास कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।
इन नदियों के किनारे सड़क नेटवर्क के साथ-साथ औद्योगिक कॉरिडोर भी तैयार किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंगा, गंडक और कोसी के तटों पर आधुनिक रिवर-फेसिंग टाउनशिप विकसित करने की योजना तैयार की जाए।
उपलब्धियों की बुकलेट और प्रचार रथ रवाना
कार्यक्रम के दौरान 'सेवा, संकल्प और समर्पण' थीम पर सरकार के 100 दिनों की उपलब्धियों की एक पुस्तिका जारी की गई। साथ ही सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए डिजिटल एवं प्रिंट प्रचार रथों को भी रवाना किया गया।
सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रखा जाएगा, ताकि बिहार को तेज आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया जा सके।
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