क्या ₹1 लाख तक गिरेगा सोना? Gold की कीमतों में गिरावट के पीछे ये 4 बड़े कारण

मुंबई
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सोना करीब 27 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि भारतीय बाजार में जनवरी के शिखर से करीब 23 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं अगस्त के MCX हाई से देखें तो घरेलू बाजार में सोना 10 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है. ऐसे में त्योहारों और वेडिंग सीजन से पहले सोना खरीदने वालों के सामने सवाल है कि क्या कीमतों में अभी और गिरावट बाकी है।
अगस्त के हाई से कितना सस्ता हुआ सोना?
MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स अगस्त के आखिरी हफ्ते में 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था. इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और पिछले हफ्ते भाव 1,45,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक आ गया यानी अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से कीमत करीब 11 फीसदी नीचे आ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट आई है. स्पॉट गोल्ड अगस्त के करीब 4,698 डॉलर प्रति औंस के हाई से गिरकर पिछले हफ्ते करीब 4,130 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
सोने में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
सोने में हाल की गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर हैं. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से शुरुआत में कीमतों पर दबाव आया. इसके बाद अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने भी सोने की तेजी को कमजोर किया. अमेरिकी बॉन्ड की रियल यील्ड में तेज बढ़ोतरी से बिना ब्याज देने वाला सोना निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हुआ है. वहीं डॉलर में मजबूती ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा ऊंची महंगाई और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है।
क्या 1.25 लाख तक गिरेगा सोना?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. लेकिन 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अभी बेस केस नहीं है. जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड में 4,025-3,950 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट की गुंजाइश है. इसका असर MCX गोल्ड फ्यूचर्स पर पड़ने पर कीमत करीब 1,46,200-1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है. उनके मुताबिक 1.25 लाख रुपये का स्तर तभी देखने को मिल सकता है, जब अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेजी आए और अक्टूबर में अमेरिकी CPI महंगाई का आंकड़ा अनुमान से काफी ज्यादा रहे. फिलहाल उन्हें ऐसी स्थिति की संभावना कम लगती है।
1.34 लाख रुपये तक गिर सकता है सोना?
जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए 3,930-4,000 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट जोन अहम है. अगर ये सपोर्ट टूटता है तो अगला सपोर्ट 3,600-3,750 डॉलर प्रति औंस का हो सकता है. उनके मुताबिक इस सपोर्ट जोन तक पहुंचने की संभावना करीब 25 फीसदी है. ऐसी स्थिति में भारतीय बाजार में सोना करीब 1,34,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है. हालांकि ये कोई बेस केस अनुमान नहीं है, बल्कि उस स्थिति का आकलन है जब अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें मौजूदा सपोर्ट से और नीचे जाती हैं।
1 लाख रुपये तक गिरने की कितनी संभावना?
1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिरावट को एक्सपर्ट्स फिलहाल बेहद असंभावित मान रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक घरेलू सोने को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2,800 डॉलर प्रति औंस तक गिरनी होगी. उनके मुताबिक सोने को अभी भी कई स्ट्रक्चरल फैक्टर से सपोर्ट मिल रहा है. इनमें डी-डॉलराइजेशन, जियोपॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और महंगाई को लेकर लंबी अवधि की चिंताएं शामिल हैं यानी 1 लाख रुपये का स्तर देखने के लिए मौजूदा परिस्थितियों में काफी बड़ा बदलाव जरूरी होगा।
भारत में गिरावट कितनी सीमित रह सकती है?
भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले सोने की गिरावट कुछ हद तक सीमित रह सकती है. इसकी एक बड़ी वजह रुपये की चाल है. डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने का घरेलू भाव रुपये की मजबूती या कमजोरी से भी प्रभावित होता है. इसके अलावा भारत में फेस्टिव और वेडिंग सीजन शुरू हो रहा है, जिससे सोने की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये डिमांड कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकती है. हालांकि ऊंची कीमतों का असर ज्वैलरी खरीदारी पर भी दिख रहा है. ग्राहक ज्यादा हल्की ज्वैलरी खरीदने पर जोर दे रहे हैं।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
मौजूदा संकेत बताते हैं कि शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के आसपास का सपोर्ट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आगे की दिशा के लिए अहम रहेंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा करेक्शन तत्काल अवधि में जारी रह सकता है, लेकिन इसे लंबी अवधि की तेजी के बीच एक कंसोलिडेशन फेज के तौर पर भी देखा जा सकता है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF में निवेश और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसे फैक्टर सोने को लंबे समय में सपोर्ट दे सकते हैं।
विदेशी कनेक्शन
वहीं 1.25 लाख रुपये तक की गिरावट संभव जरूर है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेज बढ़ोतरी और अक्टूबर की महंगाई के अनुमान से काफी ऊपर आने जैसी परिस्थितियां बननी होंगी. फिलहाल एक्सपर्ट्स इसकी संभावना कम मान रहे हैं. इसलिए मौजूदा स्थिति में सोने की कीमतों को लेकर तस्वीर दोतरफा है. शॉर्ट टर्म में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, लेकिन 1 लाख रुपये जैसे बहुत निचले स्तर की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है।











