
चंडीगढ़
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव अब केवल पदों की अदला-बदली का मामला नहीं रह गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार हो रही नई टीम को 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले राज्यों में होने वाले चुनावों की संगठनात्मक जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी ने मई में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष बदलकर संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। इसके बाद राष्ट्रीय टीम में अनुभवी नेताओं और अपेक्षाकृत नए चेहरों के मिश्रण की चर्चा सामने आ रही है।
ऐसे में हरियाणा के लिए असली सवाल यह नहीं है कि राष्ट्रीय टीम में राज्य को कितनी जगह मिलती है, बल्कि यह है कि किन नेताओं को ऐसी जिम्मेदारी दी जाती है, जिनका इस्तेमाल पार्टी हरियाणा के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी कर सकती है।
हरियाणा से सबसे स्पष्ट नाम ओमप्रकाश धनखड़ का है। वह इस समय भाजपा के राष्ट्रीय सचिव हैं और राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं। धनखड़ कई राज्यों लगातार सक्रिय हैं और संगठन तथा चुनावी तैयारियों से जुड़े कार्यक्रमों में भाजपा का पक्ष रखते दिखाई दिए हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और हरियाणा राज्य सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो के चेयरमैन एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के नामों पर भी पार्टी विचार कर रही है। कृष्णपाल गुर्जर की पार्टी में बड़ी स्वीकार्यता है।
अगला महत्वपूर्ण नाम पूर्व सांसद डाॅ. सुधा यादव का है। वह भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य हैं, जो पार्टी के सर्वोच्च निर्णयकारी निकायों में से एक है। इसलिए हरियाणा का राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व आंकते समय उन्हें नजर अंदाज करना मुश्किल होगा। भाजपा सुधा यादव को राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
सिरसा की पूर्व सांसद सुनीला दुग्गल हरियाणा में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष की प्रबल दावेदार थी, लेकिन अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. अर्चना गुप्ता की टीम में उपाध्यक्ष बनाया गया है। सुनीता दुग्गल पर भी पार्टी दाव खेल सकती है।
सुभाष बराला, संजय भाटिया, रेखा शर्मा और कैप्टन अभिमन्यु प्रबल दावेदार
राज्यसभा सदस्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के पास लंबा संगठनात्मक अनुभव है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल भाजपा के हरियाणा में विस्तार के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा है।
फिलहाल बराला राज्यसभा सदस्य हैं और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। भाजपा के ही राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया भी संभावित चेहरों की चर्चा में रखे जा सकते हैं। वह अप्रैल 2026 से राज्यसभा में हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उन्हें संगठनात्मक व चुनावी दृष्टि से काम करने का लंबा अनुभव हासिल है। हरियाणा सरकार में पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु पूर्व में राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ऐसे में उन्हें भी पार्टी मौका प्रदान कर सकती है।
भाजपा की राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा का मामला भी अलग महत्व रखता है। पूर्व राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष और मौजूदा राज्यसभा सांसद होने के कारण उनके पास राष्ट्रीय स्तर का सार्वजनिक और महिला-केंद्रित राजनीतिक अनुभव है।
हरियाणा का समीकरण अब सिर्फ जातीय प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं
नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा की तस्वीर को समझने के लिए एक और बदलाव महत्वपूर्ण है। मई में पार्टी ने डा. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर महिला नेतृत्व को आगे किया। पार्टी के राष्ट्रीय पुनर्गठन में भी नए और युवा चेहरों तथा महिलाओं को अधिक जगह देने की चर्चा रही है।
इसका अर्थ यह हो सकता है कि हरियाणा से किसी ऐसे चेहरे को राष्ट्रीय भूमिका मिले, जो अभी राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख पद पर नहीं है। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का मामला संगठनात्मक पद से अधिक राजनीतिक वजन का है।
वह केंद्र में मंत्री हैं और दक्षिण हरियाणा में उनका मजबूत प्रभाव है। लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने जिस तरह गुरुग्राम में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उसके मद्देनजर राव इंद्रजीत की राष्ट्रीय संगठन में एंट्री मुश्किल है।











