आज का मौसम: यूपी-बिहार में झमाझम बारिश, गुजरात में रेड अलर्ट; जानें अगस्त में कैसा रहेगा मॉनसून

नई दिल्ली
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मॉनसून के फिर से सक्रिय होने और मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान खासतौर पर गुजरात के लिए सबसे बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, मौसम विभाग ने मॉनसून के दूसरे भाग यानी अगस्त और सितंबर महीने के लिए भी पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसमें बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है।
गुजरात पर सबसे बड़ा खतरा, 30 सेमी से अधिक बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, पश्चिमी विदर्भ और उससे सटे दक्षिण मध्य प्रदेश के ऊपर एक डिप्रेशन बना हुआ है। यह तेजी से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और इसके पश्चिमी मध्य प्रदेश और गुजरात को पार करते हुए अगले 12 घंटों में एक 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' में तब्दील होने की संभावना है।
इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा खामियाजा गुजरात को भुगतना पड़ेगा। 1 अगस्त को गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर 30 सेंटीमीटर से अधिक यानी 'अत्यधिक भारी बारिश' होने का अलर्ट जारी किया गया है।
आज 1 अगस्त 2026 को यूपी बिहार का मौसम कैसा रहेगा?
आज शनिवार, 1 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश और बिहार में मॉनसून सक्रिय रहेगा। दोनों राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 से 4 अगस्त तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 अगस्त तक बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी है। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और बाद में गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। आर्द्रता अधिक रहने से मौसम उमस भरा महसूस होगा।
बिहार में 31 जुलाई से 4 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना है। राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है। पटना और आसपास के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 33-34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26-27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। मौसम सामान्यतः बादल छाए रहने वाला और उमस भरा रहेगा।
इन राज्यों में भी मूसलाधार बारिश की चेतावनी
गुजरात के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, पूर्वी राजस्थान, लक्षद्वीप, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा) में भी भारी बारिश की संभावना है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और माहे, लक्षद्वीप तथा तेलंगाना में तेज सतही हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।
इन इलाकों में 'फ्लैश फ्लड' (अचानक बाढ़) का रिस्क
IMD ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में 'फ्लैश फ्लड' का जोखिम भी जताया है। इनमें पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ शामिल हैं। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों और कमजोर इमारतों से दूर रहने और बाहर निकलने से पहले ट्रैफिक का हाल जानने की सलाह दी है।
अगस्त और सितंबर में कैसा रहेगा मॉनसून?
वर्तमान में हो रही भारी बारिश के बावजूद, मौसम विभाग का अगस्त और सितंबर के लिए पूर्वानुमान किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। IMD के अनुसार, अगस्त-सितंबर में देश भर में औसत बारिश 'सामान्य से कम' रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण 'अल नीनो' (El Niño) का लगातार बना रहना है, जो मानसून को कमजोर करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी हिस्सों और पूर्व-पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इस दौरान 'सामान्य या सामान्य से अधिक' बारिश हो सकती है, लेकिन इससे देश भर के कुल औसत मात्रा में कोई खास बदलाव नहीं आएगा।
जुलाई की बारिश से घटी मॉनसून की कमी
मौसम विभाग ने जुलाई के महीने में भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया था, लेकिन मध्य भारत में अच्छी बारिश के कारण यह महीना 'सामान्य' बारिश वाला साबित हुआ। IMD प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, जुलाई में 13.5 दिनों के सामान्य औसत की तुलना में रिकॉर्ड 24 दिनों तक 'लो प्रेशर सिस्टम' (LPS) का प्रभाव रहा। बंगाल की खाड़ी में 4 लो प्रेशर सिस्टम बने, जिसके कारण ओडिशा से गुजरात तक बेहतरीन बारिश हुई।
दो लंबे वेट स्पेल (बारिश के दौर) के कारण मानसून की कुल कमी में बड़ा सुधार हुआ है। जून में जो कमी 35% थी, वह जुलाई के अंत तक घटकर लगभग 13% रह गई। खेती के लिहाज से भी जुलाई की यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं थी। गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों के रकबे में 3 जुलाई तक जो 21% की कमी थी, वह 31 जुलाई तक घटकर केवल 3% रह गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दूसरे हिस्से के तहत अगस्त से सितंबर तक देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। बारिश 'दीर्घावधि औसत' 94 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान जताया गया है। दीर्घावधि औसत (एलपीए) 1971 से 2020 के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर, अगस्त से सितंबर की अवधि के दौरान पूरे देश में बारिश का एलपीए 422.8 मिलीमीटर है। एलपीए, किसी खास इलाके में एक तय समय (जैसे महीना या मौसम) में हुई बारिश का औसत होता है, जो आमतौर पर 30 से 50 साल की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है।











