साई सुदर्शन के बाहर होते ही सरफराज खान की टीम इंडिया में वापसी, श्रीलंका दौरा अहम

बी साई सुदर्शन के चोटिल होकर बाहर होने के बाद सरफराज खान को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है. दाएं पैर के अंगूठे में स्ट्रेस रिएक्शन के कारण सुदर्शन सीरीज से बाहर हुए हैं.
श्रीलंका दौरा सरफराज के लिए इसी लिहाज से बेहद अहम है. भारतीय टेस्ट टीम में मिडिल ऑर्डर की जगहों के लिए मुकाबला आसान नहीं है. ऐसे में अगर उन्हें मौका मिलता है तो यह सिर्फ एक और टेस्ट मैच नहीं होगा. यह उस खिलाड़ी के लिए परीक्षा होगी, जिसके बारे में बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की बातें होती रही हैं.
12 साल की उम्र में 439… और दुनिया की नजरें
सरफराज ने तब दुनिया का ध्यान खींचा था, जब 12 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के हैरिस शील्ड इंटर-स्कूल टूर्नामेंट में 439 रन ठोक दिए थे. रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए खेलते हुए उनकी पारी में 56 चौके और 12 छक्के शामिल थे. उस उम्र में ऐसी पारी ने उनके बारे में उम्मीदों को आसमान तक पहुंचा दिया.
सरफराज की उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को शक था कि उन्होंने अपनी वास्तविक उम्र से कम उम्र बताई है. इसी आरोप में उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया. बाद में उनकी उम्र की जांच के लिए एडवांस टेस्ट कराया गया. टेस्ट के नतीजे स्वीकार किए गए और इसके बाद सरफराज को दोबारा क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई.
अंडर-19 में धमाका, फिर भारत की दहलीज
मुंबई अंडर-19 के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद सरफराज को 2013 में भारत की अंडर-19 टीम में जगह मिली. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 66 गेंदों में शतक जड़कर अपनी टीम को जीत दिलाई.
2014 के अंडर-19 विश्व कप में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. छह मैचों में 211 रन और 70.33 का एवरेज बताता है कि वह सिर्फ प्रतिभाशाली नहीं, बड़े मंच पर प्रदर्शन करने की क्षमता भी रखते थे.
इसके बाद आईपीएल का दरवाजा खुला. 2015 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उन्हें 50 लाख रुपये में खरीदा और वह आईपीएल खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हो गए. अगले साल अंडर-19 विश्व कप में उन्होंने फिर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया. बांग्लादेश में खेले गए उस टूर्नामेंट में 355 रन बनाकर वह भारत के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. कई मौकों पर उन्होंने टीम को मुश्किल शुरुआत से बाहर निकाला.
घरेलू क्रिकेट के रन, टेस्ट का इंतजार
सरफराज ने 2015-16 घरेलू सत्र में मुंबई छोड़कर उत्तर प्रदेश का रुख किया. बाद में मुंबई लौटे और घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाते रहे. उनकी बल्लेबाजी ने उन्हें टेस्ट टीम के दरवाजे तक पहुंचाया.
टेस्ट क्रिकेट में अब तक उनके नाम 6 मैचों में 11 पारियों से 371 रन हैं. उनका उच्चतम स्कोर 150 है और औसत 37.10 का है. उनके खाते में एक शतक और तीन अर्धशतक हैं.
ये आंकड़े खराब नहीं हैं, लेकिन सरफराज की कहानी में सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है. सवाल यह है कि जिस खिलाड़ी से बचपन से असाधारण उम्मीदें की गईं, क्या वह अब इंटरनेशनल स्तर पर अपनी जगह को स्थायी बना सकता है?
अब अतीत नहीं, वर्तमान बोलेगा
सरफराज के करियर की सबसे बड़ी ताकत उनकी प्रतिभा रही है. लेकिन भारतीय टीम में जगह बनाए रखने के लिए प्रतिभा के साथ निरंतरता भी चाहिए. घरेलू क्रिकेट के रन, अंडर-19 के रिकॉर्ड और किशोर उम्र में बनाए गए कारनामे उन्हें टीम तक पहुंचा सकते हैं, लेकिन टीम में बनाए रखने का काम सिर्फ वर्तमान प्रदर्शन करेगा.
यही श्रीलंका दौरे को उनके लिए खास बनाता है. मौका मिलता है तो सरफराज के सामने दोहरी चुनौती होगी. पहली, श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन के खिलाफ खुद को साबित करना. दूसरी, टीम मैनेजमेंट को यह भरोसा दिलाना कि वह सिर्फ एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं, बल्कि भारतीय टेस्ट मिडिल ऑर्डर की जरूरत भी हैं.
क्योंकि अब भारतीय क्रिकेट में हर स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. नए खिलाड़ी दस्तक दे रहे हैं और बेंच पर मौजूद विकल्प चयनकर्ताओं का सिरदर्द बढ़ा रहे हैं.
सरफराज के लिए इसलिए संदेश बिल्कुल साफ है- 439 रन की वह किशोर उम्र वाली पारी इतिहास है, अंडर-19 के रिकॉर्ड इतिहास हैं और घरेलू क्रिकेट के रन भी इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं. अब भविष्य तय करने का काम बल्ले को करना है.
श्रीलंका दौरे के लिए टेस्ट स्क्वॉड: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, आकिब नबी और सरफराज खान.











