
पठानकोट
पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया।
निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।
हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।
DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।
आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।
अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई।
हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…
एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।
विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े।
विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।
अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।
स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?
18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।
अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।
मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।
एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।











