पंजाबराज्य

पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी तो नहीं मिलेगी फैमिली पेंशन, हाई कोर्ट का अहम फैसला

चंडीगढ़.

पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने वाली महिला को मृत सरकारी कर्मचारी की फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं मिल सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि दूसरा विवाह नियमों और कानून के विपरीत किया गया है तो ऐसी महिला को मृत कर्मचारी की ‘विधवा’ नहीं माना जा सकता और वह राज्य से पारिवारिक पेंशन की मांग भी नहीं कर सकती।

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने मोहाली निवासी प्रिया की ओर से दायर अपील एलपीए को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत दूसरी शादी तभी मान्य हो सकती है जब वह कानूनन वैध हो। पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह शून्य माना जाएगा और उससे किसी प्रकार का पेंशन संबंधी अधिकार पैदा नहीं होता।

अधिकारों को लेकर शुरू हुआ विवाद
मामले के अनुसार, मेजर हरि सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पहली पत्नी मोहिंदर कौर और प्रिया के बीच सेवानिवृत्ति लाभों तथा अन्य अधिकारों को लेकर विवाद शुरू हुआ था। मोहिंदर कौर ने दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर खुद को मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी बताते हुए सेवानिवृत्ति लाभों पर अधिकार मांगा था। ट्रायल कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें कानूनी पत्नी माना। हालांकि, बाद में अपीलीय अदालत ने विवाह संबंधी साक्ष्यों और एक वसीयत के आधार पर प्रिया को कानूनी पत्नी मान लिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने अपीलीय अदालत का फैसला पलटते हुए फिर से मोहिंदर कौर को ही मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी घोषित कर दिया था। इसके बाद प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली और वर्ष 2006 में उनकी अपील खारिज कर दी गई।

फैमिली पेंशन में मांगी हिस्सेदारी
इसके बावजूद प्रिया ने एक नया तर्क देते हुए फैमिली पेंशन में हिस्सेदारी की मांग की। उनका कहना था कि भले ही उन्हें कानूनी पत्नी का दर्जा न मिला हो, लेकिन केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के नियम 54(7) के तहत उन्हें सह-विधवा मानकर पारिवारिक पेंशन का हिस्सा दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने इस दलील को विस्तार से परखा और कहा कि नियम 54(7) में एक से अधिक विधवाओं के बीच पेंशन बांटने का प्रविधान है, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिल सकता है जिनका विवाह कानूनन वैध हो। अदालत ने कहा कि ‘विधवा’ शब्द का सामान्य और कानूनी अर्थ मृत व्यक्ति की वैध पत्नी से है। यदि विवाह ही कानून की नजर में मान्य नहीं है तो संबंधित महिला को विधवा का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

दूसरी शादी नहीं कर सकते सरकारी सेवक?
खंडपीठ ने कहा कि सरकारी सेवकों के लिए लागू नियम पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर रोक लगाते हैं। ऐसे में दूसरी शादी से उत्पन्न संबंध राज्य के विरुद्ध किसी वैधानिक अधिकार का आधार नहीं बन सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता या घरेलू संबंधों से जुड़े कुछ मामलों में न्यायालय अलग दृष्टिकोण अपना सकते हैं, लेकिन फैमिली पेंशन एक वैधानिक अधिकार है, जिसे केवल नियमों के अनुरूप ही प्रदान किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि जब पहले ही विभिन्न न्यायिक मंचों पर यह तय हो चुका है कि मोहिंदर कौर ही मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी थीं और प्रिया का वैवाहिक दावा स्वीकार नहीं किया गया, तब उन्हें फैमिली पेंशन का लाभ देने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button