
चंडीगढ़.
चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया है. जगदीश राज अरोड़ा नाम के व्यक्ति ने अपनी दिवंगत पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन के बकाया भुगतान के लिए वर्ष 2023 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुदर्शन कुमारी गुरदासपुर-द्वितीय में ब्लाक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं.
याचिकाकर्ता के मुताबिक उनकी पत्नी की पेंशन का बकाया करीब वर्ष 2007 से लंबित है. करीब डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ. इस दौरान अरोड़ा सरकारी कार्यालयों और बैंक के चक्कर लगाते रहे. मामले में संबंधित विभाग और बैंक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, लेकिन बकाया राशि का समाधान नहीं हो सका.
विभाग और बैंक देते रहे अलग-अलग दलील
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह स्पष्ट हुआ कि याचिकाकर्ता के पेंशन बकाये के अधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है. गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से बताया गया कि अकाउंटेंट जनरल, पंजाब के कार्यालय ने 24 सितंबर 2012 को जिला कोषाधिकारी को पत्र भेजा था. विभाग के अनुसार बैंक ऑफ इंडिया ने इस निर्देश को लागू नहीं किया. दूसरी ओर बैंक की ओर से दलील दी गई कि जिला कोषाधिकारी की ओर से आवश्यक अनुपालन नहीं किए जाने के कारण बकाया पेंशन जारी नहीं हो सकी. इस तरह भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा.
हाई कोर्ट ने अधिकारियों के वेतन पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि 80 वर्षीय याचिकाकर्ता अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं और इसके बावजूद उन्हें अपने जायज हक के लिए लंबे समय तक भटकना पड़ा. कोर्ट ने पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के सचिवों को निर्देश दिया कि गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कोषाधिकारी अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे. इसके साथ ही बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक को भी निर्देश दिया गया कि संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक और शाखा प्रबंधक कोर्ट की अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे. हाई कोर्ट ने यह कदम तब तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया है, जब तक पेंशन के बकाये से जुड़ा मामला प्रभावी तरीके से हल नहीं हो जाता.











