मेसी के मैच से पहले याद आए छेत्री, एरोहेड में रचा था इतिहास

कंसास सिटी
रविवार सुबह कंसास सिटी के एरोहेड स्टेडियम में लियोन मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना विश्व कप में स्विट्जरलैंड के विरुद्ध क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेलने उतरेगी। स्टेडियम के आसपास अर्जेंटीना के नीले-सफेद रंग की धूम है, लेकिन इसी मैदान से भारतीय फुटबॉल की भी एक सुनहरी याद जुड़ी है।
करीब 16 साल पहले भारत के पूर्व फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री ने यहीं विश्व फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में से एक मैनचेस्टर युनाइटेड के विरुद्ध मैदान पर कदम रखा था। भले ही वह मुकाबला आधिकारिक प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं था, लेकिन भारतीय फुटबॉल के इतिहास में उसका महत्व किसी उपलब्धि से कम नहीं है।
2010 की है बात
साल 2010 में 25 वर्षीय छेत्री अपने करियर को नई दिशा देने के इरादे से अमेरिका पहुंचे थे। मार्च में उन्होंने मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) क्लब कंसास सिटी विजार्ड्स के साथ ट्रायल दिया। प्री-सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद क्लब ने 24 मार्च को उन्हें अनुबंधित कर लिया। तत्कालीन मुख्य कोच पीटर वर्मेस ने उनकी मेहनत और तकनीकी क्षमता की खुलकर सराहना की। छेत्री ने 14 अप्रैल को कोलोराडो रैपिड्स के विरुद्ध यूएस ओपन कप प्ले-इन मुकाबले में क्लब के लिए पदार्पण भी किया, लेकिन असली यादगार पल अभी बाकी था।
25 जुलाई 2010 को एरोहेड स्टेडियम में 52,424 दर्शकों की रिकॉर्ड भीड़ के सामने कंसास सिटी विजार्ड्स का सामना सर एलेक्स फर्ग्यूसन की टीम से हुआ। युनाइटेड की टीम में रायन गिग्स, पॉल स्कोल्स, नानी और दिमितार बरबातोव जैसे विश्व फुटबॉल के बड़े सितारे मौजूद थे। अधिकांश दर्शक लाल जर्सी पहनकर यूनाइटेड का समर्थन कर रहे थे, लेकिन घरेलू टीम ने शानदार जज्बा दिखाया।
छेत्री ने संभाला मोर्चा
कंसास सिटी ने शुरुआती बढ़त बनाई। एक खिलाड़ी के लाल कार्ड के बाद टीम 10 खिलाड़ियों तक सिमट गई, फिर भी उसने हार नहीं मानी। इसी मुकाबले के 69वें मिनट में सुनील छेत्री को मैदान पर उतरने का मौका मिला। उनके लिए यह सिर्फ एक बदलाव नहीं था, बल्कि उस सपने का सच होना था, जिसे हर युवा फुटबॉलर जीना चाहता है। वर्षों बाद छेत्री ने उस पल को याद करते हुए कहा था, जब मैं मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा था, तब एहसास हुआ कि जिन खिलाड़ियों के विरुद्ध खेलने जा रहा हूं, उन्हें कुछ ही सप्ताह पहले विश्व कप में टीवी पर देख रहा था। यह मेरे करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। सभी को लगा था कि मैनचेस्टर युनाइटेड हमें आसानी से हरा देगा, लेकिन 10 खिलाड़ियों के साथ भी हमने जीत हासिल की।
लंबा नहीं चला सफर
हालांकि एमएलएस में छेत्री का सफर लंबा नहीं चला और फरवरी 2011 में कंसास सिटी विजार्ड्स ने उन्हें रिलीज कर दिया, लेकिन एरोहेड स्टेडियम में मैनचेस्टर युनाइटेड जैसी विश्वविख्यात टीम के सामने खेलना उनके करियर की ऐसी उपलब्धि बन गया, जिसे भारतीय फुटबाल हमेशा गर्व के साथ याद करेगा।











