
चंडीगढ़.
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकारी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सदन में प्रस्ताव पेश किया।
प्रस्ताव में परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि बार-बार प्रश्नपत्र लीक, परीक्षाओं में धोखाधड़ी, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं ने योग्यता आधारित व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है तथा लाखों युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। प्रस्ताव में कहा गया कि पिछले एक दशक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के शासन में प्रश्नपत्र लीक, डिजिटल परीक्षा प्रणाली में सेंध और भर्ती घोटालों सहित 70 से अधिक बड़े परीक्षा घोटाले सामने आए हैं। इससे पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था में लोगों का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर हुआ है।
पुलिस बल के प्रयोग पर उठाए सवाल
हरपाल सिंह चीमा ने प्रस्ताव में कहा कि जवाबदेही की मांग कर रहे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों के जवाब में मनमानी गिरफ्तारियां, आपराधिक मामले दर्ज करने और बल प्रयोग जैसी कार्रवाई की गई, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। प्रस्ताव में पर्यावरण प्रेमी और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने और उन्हें बदनाम किए जाने की कड़ी निंदा भी की गई। इसमें कहा गया कि प्रश्नपत्र लीक मामलों में जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन के कारण उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया और दमन का सामना करना पड़ा।
एफआईआर करने का किया विरोध
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि विभिन्न राज्यों में शांतिपूर्ण और निहत्थे छात्रों के प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया। छात्रों के खिलाफ आंसू गैस के इस्तेमाल तथा बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इसमें कहा गया कि नाबालिग छात्र-छात्राओं के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कई प्राथमिकी दर्ज की गईं। सदन के समक्ष रखे गए प्रस्ताव में प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और संस्थागत विफलताओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई। साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, मनमानी हिरासत तथा आपराधिक कार्रवाई की भी निंदा करते हुए देशभर के छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई। प्रस्ताव में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी गैरवाजिब आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
संस्थाओं में सुधार की रखी मांग
प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से सरकारी परीक्षा प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाओं में सुधार और विकेंद्रीकरण करने, प्रश्नपत्र लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को उपचार, पुनर्वास और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही सिफारिश की गई कि इस प्रस्ताव की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को भेजी जाएं, ताकि सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा संबंधी पंजाब विधानसभा का मत केंद्र सरकार तक पहुंच सके।











