
चंडीगढ़
पंजाब में गेहूं की कटाई के साथ अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस बार केंद्र सरकार सख्त रुख में है। केंद्र खुद इन मामलों की निगरानी करेगा। राज्य सरकार ने इसके लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान लागू किया है। आज से कटाई शुरू होने के साथ ही 10,500 अधिकारियों को तैनात किया गया है जो खेतों में नजर रखेंगे। साथ ही एक कंट्रोल रूम बनाया गया है जिससे सैटेलाइट के जरिए घटनाओं की निगरानी की जाएगी।
100 किसानों पर तैनात होगा एक नोडल अधिकारी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पहले ही दिशा-निर्देश जारी करते हुए 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा है। पंजाब में हर साल 1 अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की कटाई होती है। राज्य में करीब 34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है जिससे लगभग 205 लाख टन भूसा निकलता है। कम समय में धान की रोपाई के दबाव के कारण किसान अवशेषों को आग लगा देते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ता है।
सरकार की तैयारी
अवशेष जलाने पर रोक के लिए सरकार ने कस्टम हायरिंग सेंटरों पर 31 हजार स्ट्रॉ रीपर उपलब्ध कराए हैं जो अवशेषों को काटकर चारे में बदलते हैं। इसके अलावा पेलेट निर्माण, इंडस्ट्रियल बॉयलर और सीबीजी प्लांट में भी अवशेषों के उपयोग की योजना बनाई गई है। हर ब्लॉक स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि किसानों को वैकल्पिक उपायों के बारे में जानकारी दी जा सके।
विभागों की जिम्मेदारी तय
सरकार ने विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय की है। खेत में अवशेष प्रबंधन का काम कृषि और सहकारिता विभाग को दिया गया है जबकि बाहरी निपटान का जिम्मा नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, उद्योग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपा गया है। अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लागू कराने की जिम्मेदारी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग और जिला उपायुक्तों की होगी।











