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पूर्णिया दौरे पर PM मोदी, तेजस्वी बोले- ‘विकास नहीं, सिर्फ जुमलों की बारिश!’

पटना
बिहार के पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 15 सितंबर 2025 को होने वाले इस दौरे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने तीखा तंज कसा है। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी ने पीएम मोदी को 'जुमलों की बारिश' करने का आरोप लगाते हुए पूर्णिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) की बदहाली पर सवाल खड़े किए हैं। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो शेयर कर सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बोला है। यह दौरा सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से है, लेकिन विपक्ष इसे विकास के नाम पर प्रचार का हथियार बता रहा है।

पीएम मोदी का दौरा और विकास परियोजनाएं
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया पहुंचेंगे, जहां वे पूर्णिया एयरपोर्ट पर नए सिविल एन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे कई रेल परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जिसमें वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों को फ्लैग ऑफ करना शामिल है। यह दौरा बिहार में रेल और हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं से सीमांचल क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि ये घोषणाएं कागजी हैं और जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आ रहा।
 
तेजस्वी की आलोचना और GMCH का हाल
तेजस्वी यादव ने 13 सितंबर की रात पूर्णिया GMCH का अचानक निरीक्षण किया और वहां की बदतर स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जो वायरल हो गया। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी जुमलों की बारिश करने आ रहे हैं। वे विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आय और सिंचाई की बात नहीं करेंगे। तेजस्वी ने पीएम से अपील की कि वे दौरा के दौरान GMCH का दौरा करें और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को साथ लाएं, ताकि 20 वर्षों की सरकार की नाकामी देख सकें।

निरीक्षण में कई खामियां आई सामने
निरीक्षण में सामने आई खामियां चौंकाने वाली हैं। GMCH में ICU और ट्रॉमा सेंटर का अभाव है, कार्डियोलॉजी विभाग नहीं चल रहा। एक बेड पर तीन-तीन मरीज लेटे हैं, बेडशीट 15-20 दिनों से नहीं बदली गई। ऑर्थोपेडिक और दिव्यांग मरीजों के लिए शौचालय पहुंच से बाहर हैं। नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है—255 स्वीकृत पदों पर केवल 55 भरे हैं, जिससे ड्यूटी पर मात्र 18 नर्सें हैं। डॉक्टरों के 80% पद खाली हैं, और पूरे कॉलेज में सिर्फ चार ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट हैं। कई विभाग बंद पड़े हैं, मेडिकल इंटर्न को छह माह से वेतन नहीं मिला।

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