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हरियाणा में किसानों को बड़ी राहत, ₹7870 करोड़ की बिजली सब्सिडी और 10 पैसे यूनिट बिजली का ऐलान

चंडीगढ़
 हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। इस कड़ी में अब किसानों को बिजली पर करोड़ों रुपए की सब्सिडी मिलेगी। किसानों को इसी वित्तीय वर्ष में 138.2 करोड़ यूनिट अतिरिक्त बिजली दी जाएगी। किसानों को यह बिजली 10 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से दी जाएगी। खास बात यह है कि सरकार की ओर से 10686.64 मिलियन यूनिट बिजली दी जाएगी और कुल 7870.32 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार से गेहूं भंडारण के लिए भी किसानों को बड़ी सहायता दी जाएगी। जूट बैग खरीद से किसानों को सुरक्षित भंडारण का लाभ मिलेगा। सरकार की ओर से 550 करोड़ रुपए की लागत से जूट एवं अन्य स्टोरेज बैग खरीद को मंजूरी दी गई है।

गौरतलब है कि हरियाणा में भाजपा सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में किसानों को कृषि के लिए बिजली का जल्दी कनैक्शन व निर्बाध बिजली देने के लिए हरियाणा एग्री डिस्कॉम नाम से तीसरी बिजली कंपनी बनाई जाएगी। यह कंपनी 5084 कृषि फीडरों के अंतर्गत आने वाले करीब 7 लाख 12 हजार किसानों को सेवाएं देगी। किसानों को सीधा बाजार देने के लिए प्रदेशभर में ग्रामीण हॉट मंडियां स्थापित की जाएंगी। सरकार की ओर से इस वित्तीय वर्ष में मशरूम, स्ट्राबेरी, चीकू की खेती को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे और मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सिरसा में एक्वा केंद्र बनेगा तो ज्योतिसर और सांपला के मछली बीज फार्मों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

इसके साथ ही सरकार की ओर से पशुपालन को बढ़ावा देने के मकसद से 10 करोड़ की लागत से 100 पशुओं वाले आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित किए जाएंगे। दूध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से ही रेवाड़ी एवं अंबाला में 300-300 करोड़ रुपए की लागत से 5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले 2 नए मिल्क प्लांट बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिसार व फरीदाबाद में 100 करोड़ रुपए की लागत से मछली मंडियां एवं करनाल में 50 करोड़ रुपए की लागत से मछली प्रसंस्करण स्थापित की जाएगी।

इन योजनाओं से बदला किसानों का जीवन स्तर : हरियाणा में पिछले 11 वर्षों में भाजपा सरकार की ओर से लागू की गई कई योजनाओं से किसानों का जीवन स्तर बदला है। विशेष बात यह है कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को धान की बजाय दूसरी वैकल्पिक फसल बोने पर 8 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है। पिछले खरीफ सीजन में इस योजना के चलते ही धान के रकबे में 70 हजार एकड़ की कमी दर्ज की गई। अब किसान व्यापक पैमाने पर बागवानी एवं सब्जियों की खेती के अलावा प्राकृतिक खेती भी करने लगे हैं। सरकार की ओर से बागवानी एवं प्राकृतिक खेती पर अनुदान भी दिया जा रहा है।

किसानों को सोलर पम्प पर दिया जा रहा है अनुदान
उल्लेखनीय सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार की ओर से किसानों को सोलर पम्प लगाने पर भी 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इससे किसानों की खेती की लागत कम हुई है तो बिजली की भी बचत होने लगी है। सरकार की ओर से सफेदा एवं पॉपुलर लगाने पर भी 7 हजार रुपए प्रति एकड़ राशि किसानों को दी जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत साल 2016-17 में हरियाणा के 2 लाख 20 हजार किसानों को 296 करोड़ रुपए का क्लेम दिया गया जबकि साल 2017-18 में कुल 13 लाख किसानों को इस योजना के तहत कवर किया गया और करीब 3 लाख 24 हजार किसानों को 895 करोड़ रुपए की राशि क्लेम के रूप में दी गई।

इसी प्रकार से 2018-19 में 14 लाख किसानों को योजना में शामिल करते हुए करीब 20 लाख हैक्टेयर रकबा कवर किया गया और 941.60 करोड़ रुपए की राशि क्लेम के रूप में दी गई। साल 2019-20 में करीब 927 करोड़ रुपए का क्लेम किसानों को दिया गया। ऐसे ही 2020-21 में 880 करोड़, 2021-22 में 720 करोड़ रुपए, 2022-23 में 930 करोड़, 2023-24 में 770 एवं 2024-25 में 890 करोड़ रुपए का क्लेम किसानों को दिया गया।

किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है सरकार : नायब सैनी
मुख्यमंत्री नायब सैनी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में कृषि क्षेत्र की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार भी किसानों के कल्याण के लिए लगातार कदम उठा रही है। प्रदेश में किसानों की 24 फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है। किसानों को पशुपालन से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री सैनी का कहना है कि सरकार का पशुपालकों की आय को बढ़ाना, जोखिम घाटे को कम करना और बाजार तक सीधी पहुंच बनाना प्राथमिकता है। सरकार की ओर से सोनीपत में आधुनिक फल मंडी बनाई गई है। बागवानी व सब्जियों के अलावा प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

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