समंदर में बढ़ी भारत की शक्ति, दुश्मन के होश उड़ाने के लिए उतरेगा INS अरिदमन और INS तारागिरी

विशाखापट्टनम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर INS अरिदमन नामक भारत के तीसरे स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी के लॉन्च का संकेत दे दिया. उन्होंने लिखा कि यह कोई शब्द नहीं, यह ताकत है, ‘अरिदमन’. यह पनडुब्बी भारत की समुद्री न्यूक्लियर सुरक्षा को और मजबूत करेगी. इसके अलावा वो विशाखापट्टनम में एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी नौसेना को सौपेंगे।
INS अरिदमन में लंबी दूरी की मिसाइलें लगाई गई हैं जो दुश्मन को ज्यादा दूर से निशाना बना सकेंगी. अब यह पनडुब्बी अंतिम समुद्री परीक्षण पूरा कर चुकी है. जल्द ही स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल हो जाएगी. इससे पहले INS अरिहंत 2016 में और INS अरिघात अगस्त 2024 में सेवा में शामिल हो चुकी हैं।
राजनाथ सिंह का पोस्ट और विशाखापट्टनम दौरा
राजनाथ सिंह इन दिनों विशाखापट्टनम में हैं जहां भारत की सभी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को बनाया जाता है. आज वे यहां स्वदेशी बनी एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को कमीशन करेंगे. इसी दौरान उन्होंने अरिदमन के बारे में पोस्ट किया. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में ही कहा था कि अप्रैल-मई के बीच यह पनडुब्बी सेवा में आ जाएगी. अब अंतिम परीक्षण पूरे हो चुके हैं।
पिछली पनडुब्बियों से क्या फर्क है
INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अरिदमन ज्यादा बेहतर है. इसमें आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब लगाए गए हैं जबकि अरिहंत में सिर्फ चार थे. मतलब यह एक साथ ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगी. इसमें आठ K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर है या फिर 24 K-15 मिसाइलें जिनकी रेंज 750 किलोमीटर है. इससे भारत की समुद्री न्यूक्लियर ताकत बहुत बढ़ जाएगी. पनडुब्बी का हल्का डिजाइन इसे और चुपके से चलने में मदद करेगा।
समुद्री सुरक्षा में नई ताकत
अरिदमन के शामिल होने से भारत कंटीन्यूअस एट-सी डिटेरेंस बना सकेगा. यानी हमेशा कम से कम एक न्यूक्लियर पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर रहेगी. इससे दुश्मन कभी भी हमला करने का सोचेगा तो सोच-समझकर सोचेगा. यह पनडुब्बी भारत की नो फर्स्ट यूज न्यूक्लियर नीति को मजबूत करती है. स्वदेशी रूप से बनी होने से विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता कम हुई है. देश की डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिला है।
INS अरिदमन क्या है?
INS अरिदमन एक एडवांस न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो अरिहंत-क्लास का हिस्सा है. इसे 'S4' कोडनेम के साथ विकसित किया गया है. इसकी लंबाई करीब 125 मीटर और वजन 7,000 टन है, जो इसे पहले मॉडलों से 1000 टन ज्यादा भारी बनाता है. यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना के एडवांस्ड तकनीक वाहन (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में बनाई गई है।
यह क्यों खास है?
बढ़ी हुई ताकत: INS अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो इसे 24 छोटी रेंज की K-15 मिसाइलें (750 किमी रेंज) या 8 लंबी रेंज की K-4 मिसाइलें (3500 किमी रेंज) ले जाने की क्षमता देते हैं. यह पहले की पनडुब्बियों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है।
चुपके की तकनीक: इसमें बेहतर सोनार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग और शोर-कम करने वाली तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के लिए पता करना मुश्किल हो जाता है।
लंबी दूरी: K-4 मिसाइलों के साथ यह दुश्मन के गहरे इलाकों को निशाना बना सकती है, जो भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
स्वदेशी तकनीक: इस पनडुब्बी में करीब 70% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
भारत को क्या फायदा होगा?
न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत: INS अरिदमन के साथ भारत की जमीन, हवा और समुद्र से न्यूक्लियर हमले की क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) और मजबूत होगी. यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति को सपोर्ट करता है, यानी दुश्मन पहले हमला करे तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना।
चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सुरक्षा: चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए यह पनडुब्बी एक मजबूत जवाबी ताकत होगी।
समुद्री सुरक्षा: अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी बढ़ेगी, जो क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है।
रणनीतिक संतुलन: यह पनडुब्बी भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ दूसरा हमला (सेकंड स्ट्राइक) करने की क्षमता देती है, जो शांति बनाए रखने में मदद करेगी।
INS तारागिरी के फीचर्स
यह स्वदेशी रूप से बनी प्रोजेक्ट 17A की स्टील्थ फ्रिगेट है. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं पकड़ी जाती. यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई में बनाई गई है. इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा सामान भारत में ही बना है।
यह फ्रिगेट करीब 6670 टन वजन की है. इसकी लंबाई 149 मीटर है. यह 52 km/hr की स्पीड से चल सकती है. लंबी यात्रा के लिए इसका रेंज 10186 किलोमीटर तक है. इसमें दो डीजल इंजन और दो गैस टर्बाइन लगे हैं जो इसे तेज और लंबे समय तक चलने की ताकत देते हैं।
इसका डिजाइन बहुत चिकना और स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाला है. रडार, इंफ्रारेड और आवाज को कम करने वाली खास सामग्री इस्तेमाल की गई है ताकि दुश्मन इसे आसानी से न देख सके. इसमें 225 नाविकों की टीम काम करती है।
इसमें क्या हथियार लगे हैं
INS तारागिरी में दुनिया के बेहतरीन हथियार लगाए गए हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह मारने वाली मिसाइलें हैं जो दुश्मन के जहाजों को दूर से नष्ट कर सकती हैं. मीडियम रेंज की सतह से हवा में मारने वाली मिसाइलें भी हैं. दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढने और मारने के लिए खास एंटी-सबमरीन सिस्टम है।
इसके अलावा 127 मिलीमीटर का बड़ा मुख्य तोप भी लगा है. सब कुछ आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है ताकि पल भर में फैसला लिया जा सके. यह फ्रिगेट समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों तरह की लड़ाई लड़ सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
तारागिरी प्रोजेक्ट 17A की सात फ्रिगेट्स में से चौथी है. इससे पहले वाली शिवालिक क्लास से यह ज्यादा बड़ी, बेहतर और स्टील्थ वाली है. इसका मकसद भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाना है खासकर हिंद महासागर में. यह न सिर्फ लड़ाई के लिए है बल्कि मानवीय मदद, आपदा राहत और डिप्लोमेसी के कामों में भी इस्तेमाल होगी।











