एपस्टीन पीड़ितों का गूगल पर बड़ा आरोप, संवेदनशील जानकारी लीक करने की शिकायत दर्ज

वॉशिंगटन
सीएनबीसी के मुताबिक जेफरी एपस्टीन के पीड़ित एक समूह ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गूगल पर आरोप है कि कंपनी के एआई टूल्स और सर्च इंजन ने उनकी पर्सनल पहचान और कॉन्टैक्ट जानकारी ऑनलाइन दिखा दी। इसकी वजह से उन्हें शोषण, धमकियां और फिर से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। जाने डोई नामक एक पीड़ित ने अपनी तरह अन्य पीड़ितों के हवाले से अमेरिका के फेडरल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गूगल प्लेटफॉर्म के जरिए नाम, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर समेत बहुत ही संवेदनशील जानकारी दिखा दी गई है। हालांकि, इसे हटाने के लिए कई बार अपील भी की गई थी।
शिकायत के मुताबिक ये खुलासे तब हुए जब पीड़ितों ने अपनी जानकारी प्राइवेट रखने की कोशिश की थी। मुकदमे में इस मामले का पता 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में अमेरिकी न्यायिक विभाग द्वारा बड़ी संख्या में डॉक्यूमेंट्स जारी करने के बाद लगाया गया है। जारी किए गए रिकॉर्ड में लगभग 100 एपस्टीन पीड़ितों की अनजाने में पहचान हो गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में गलती को पहचाना और मटीरियल वापस लेने की कोशिश की, लेकिन संवेदनशील डेटा पहले ही ऑनलाइन फैल चुका था।
पीड़ितों का आरोप है कि गूगल ने इस समस्या के बारे में अलर्ट किए जाने के बाद भी अपने सर्च रिजल्ट्स और एआई-जेनरेटेड रिस्पॉन्स के जरिए यह जानकारी दिखाना जारी रखा। शिकायत में कहा गया है कि लगातार इस खुलासे से पीड़ितों को नया तनाव हो गया है। मुकदमे में कहा गया है, “अजनबी उन्हें कॉल करते हैं, ईमेल करते हैं, उनकी फिजिकल सेफ्टी के लिए खतरा पैदा करते हैं और उन पर एपस्टीन के साथ मिलकर साजिश करने का आरोप लगाते हैं जबकि असल में वे (पीड़ित शिकायतकर्ता) एपस्टीन के शिकार हैं।”
यह कानूनी कार्रवाई एआई तकनीक, प्राइवेसी और उन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है जो संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करते हैं और दिखाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक का नाम लेकर, मुकदमा बिना फिल्टर वाले एआई रिस्पॉन्स और सर्च रिजल्ट के संभावित नतीजों को दिखाता है जो पहले से ही संवेदनशील या नुकसानदायक डेटा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस केस के नतीजे का असर टेक कंपनियों के पर्सनल डेटा को संभालने के तरीके पर पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जब अपराध के शिकार या संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड शामिल हों। पीड़ित ऐसे उपाय ढूंढ रहे हैं जो आगे के खुलासे को रोक सकें और उनकी पहचान के बार-बार सामने आने से होने वाली परेशानी के लिए गूगल को जिम्मेदार ठहरा सकें।











