
लुधियाना
खाकी की हनक और रसूख के दौर में जब लोग छोटी-छोटी सिफारिशों के लिए फोन घुमाने लगते हैं, वहीं लुधियाना के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) गुरदेव सिंह ने ईमानदारी और अनुशासन की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज अब पूरे पंजाब में सुनाई दे रही है। उन्होंने अपनी ही बेटी को 'खास' समझने के बजाय एक आम नागरिक की तरह कानून का पाठ पढ़ाया और साफ कह दिया कि वर्दी का रुतबा घर की दहलीज के बाहर ही रहता है।
यह दिलचस्प और सबक देने वाला वाकया उस वक्त सामने आया जब खालसा कॉलेज में जिले के प्रिंसिपलों का एक बड़ा सम्मेलन चल रहा था। मंच पर मौजूद एसीपी गुरदेव सिंह बच्चों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाने पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का वो किस्सा साझा किया जिसे सुनकर हॉल में मौजूद हर शख्स दंग रह गया।
एसीपी ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी बेटी ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसकी गाड़ी को टो कर लिया। घबराई हुई बेटी ने तुरंत पिता को फोन लगाया, यह सोचकर कि पिता की एक डांट या एक सिफारिश उसकी गाड़ी छुड़ा देगी। लेकिन जवाब वो मिला जिसकी उसने उम्मीद नहीं की थी। एसीपी गुरदेव सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा, "इसमें मेरा कोई रोल नहीं है। तुमने नियम तोड़ा है, तो इसे खुद ही मैनेज करो।" इतना ही नहीं, उन्होंने बेटी को सख्त हिदायत दी कि वह चालान की राशि अपनी पॉकेट मनी से भरे ताकि उसे कानून की अहमियत और अपनी गलती का अहसास हो।
उन्होंने साफ कर दिया कि कानून की नजर में अफसर की बेटी और एक आम नागरिक के बीच कोई फर्क नहीं होता। सम्मेलन में मौजूद हर किसी छात्र ने इस भावुक और प्रेरणादायक पल का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। लोग एसीपी साहब के इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं। पंजाब केसरी की यह खबर उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो रसूख के दम पर नियमों को अपनी जेब में रखने की कोशिश करते हैं।
रात को बेटी की गाड़ी टो हुई: एसीपी गुरदेव सिंह ने कहा कि साल 2021 में उनकी बेटी की गाड़ी रात करीब 8:30 बजे टो हो गई थी। बेटी का फोन आया। उसने कहा कि पापा मेरी गाड़ी टो हो गई है। मैंने उससे कहा कि बेटा इसमें मेरा तो कोई रोल नहीं है।
अपनी पॉकेट मनी से मैनेज करो: उस समय मैं एसीपी ट्रैफिक था। मैंने कहा कि बेटा मैंने तो तुम्हें सिर्फ गाड़ी लेकर देनी थी। अब टो आपने करवाई है तो अब आप देखो। पॉकेट मनी आपके पास है करो मैनेज। 3 सहेलियां थीं। इनके कॉलेज में एग्जिबिशन लगी हुई थी। यहां से उन्होंने कैब ली ओर पुलिस लाइन चली गईं।
पुलिस मुलाजिम ने कहा- 1165 रुपए दो: मैंने बेटी को चेतावनी दी कि मेरे बारे कुछ बताने की वहां जरूरत नहीं है। जब बेटी पुलिस लाइन गई और उसने वहां मुलाजिम को सत श्री अकाल कहा और उन्हें बताया कि अंकल हमारी गाड़ी टो हुई है तो उस पुलिस मुलाजिम ने उसे कहा कि बेटा 1165 रुपए दो। बेटी से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम लिखवाया।
मुालिजम बोला- एसीपी साहिब की बेटी हो: पिता का नाम पूछा तो उसने बताया गुरदेव सिंह। उस मुलाजिम ने उसके चेहरे की तरफ देखा। उसने उससे कहा कि आप एसीपी साहिब की बेटी हो। उसने जवाब दिया हांजी. लेकिन अभी नहीं हूं। उसने कहा कि बेटी तो मैं उन्हीं की हूं। लेकिन इस स्टेज पर उनकी बेटी नहीं हूं।
पुलिस लाइन से मेरे पासा फोन आया: मुझे पुलिस लाइन से फोन आया। क्योंकि जो आपके साथी होते हैं वह आपकी इज्जत जरूर करते हैं। मुझे मुलाजिम ने कहा कि सर आपकी बेटी आई है। मैंने कहा कि आप वैसे ही डिल करें जैसे लोगों से करते हैं।
बेटी आज वो चालान दिखाती है: उसका मैंने चालान करवाया। अभी वह कई बार मुझे वही चालान दिखा देती है कि आपके होते हुए मेरा ये चालान हुआ था। मैं भी उससे कह देता कि बेटा कल को तुम किसी व्यक्ति को गाड़ी के नीचे देकर कह दोगी कि पापा जरां आना। मैंने उससे कहा कि मैं जेल नहीं जा सकता। मैं बुढ़ापे में जेल जाने लायक नहीं हूं। तुमने अपने जिंदगी जीनी है।
हमें बच्चों को गाइड करना चाहिए: अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीओ। इसी तरह से हमें बच्चों को गाइड करना चाहिए। यदि मैं उस दिन पुलिस लाइन में कह देता तो उस मुलाजिम ने अपने तौर पर चालान भर देना था या मेरे से बाद मैं पैसे ले लेने थे या ना भी लेता। यदि मैं उसका चालान ना करवाता तो वह मुझे आज चालान हाथ में पकड़ कर ना दिखाती।
बेटी चालान के बारे में लोगों को बताती: अब वह चार और लोगों को भी बताती है। यदि कोई उसे कह देता है कि कोमल जरां अपने पापा को कह दो तो वह उसे वही चालान दिखाकर कह देती है कि उन्होंने तो मेरी गाड़ी नहीं छुड़वाई।











