खेल

टीम इंडिया की सफलता के पीछे गौतम गंभीर अकेले नहीं, 16 लोगों की सपोर्ट स्टाफ टीम संभाल रही कमान

नई दिल्ली
आज मैदान पर उतरने वाले 11 खिलाड़ियों के पीछे कोच, डॉक्टर, फिजियो, मसाजर, ट्रेनिंग असिस्टेंट और परफॉर्मेंस एनालिस्ट की पूरी टीम काम करती है. न्यूजीलैंड दौरे के चौथे टी20 इंटरनेशनल से पहले बीसीसीआई ने एक वीडियो शेयर कर इसी आधुनिक टीम इंडिया की झलक दिखाई है.

1983 और आज की टीम इंडिया के बीच सबसे बड़ा अंतर सिर्फ सुविधाओं का नहीं, बल्कि क्रिकेट की तैयारी के पूरे सिस्टम का है. उस दौर में खिलाड़ियों को सीमित संसाधनों के बीच आपसी तालमेल, अनुभव और अपनी समझ के दम पर मैदान में उतरना पड़ता था. आज हर विभाग के लिए विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो खिलाड़ियों की छोटी-छोटी जरूरतों से लेकर विरोधी टीम के विश्लेषण तक पर काम करते हैं.

क्रिकेट का बदलता चेहरा, खिलाड़ियों के पीछे विशेषज्ञों की पूरी टीम
क्रिकेट में पहले चर्चा का केंद्र बल्लेबाज, गेंदबाज और कप्तान हुआ करते थे. मैच जीतने के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तारीफ होती थी और हार पर उनकी रणनीति पर सवाल उठते थे. लेकिन आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की तैयारी सिर्फ नेट्स में बल्लेबाजी और गेंदबाजी तक सीमित नहीं है. फिटनेस, चोट से बचाव, रिकवरी, तकनीक, रणनीति और प्रदर्शन का विश्लेषण भी उतना ही अहम हो गया है.

टीम इंडिया के न्यूजीलैंड दौरे पर इसका नमूना देखने को मिला है. बीसीसीआई ने कोचों और सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों का वीडियो साझा किया है. इस सूची में मुख्य कोच गौतम गंभीर से लेकर टीम डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, मसाजर और परफॉर्मेंस एनालिस्ट तक शामिल हैं. सूची में कुल 17 नाम हैं, जिनमें कोचिंग स्टाफ के सदस्य भी शामिल हैं.
 
यह वीडियो बताता है कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ प्रतिभा के दम पर मैदान में उतरना काफी नहीं है. खिलाड़ियों को पूरे दौरे में फिट रखने, उनकी तैयारी को बेहतर बनाने और प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखने के लिए पर्दे के पीछे भी लगातार काम होता है.

गंभीर से लेकर मोर्ने मोर्कल तक, कोचिंग की जिम्मेदारी
टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल भी इस टीम का हिस्सा हैं. साईराज बहुतुले स्पिन गेंदबाजी कोच की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सुभदीप घोष फील्डिंग कोच हैं.

सुभदीप घोष, फील्डिंग कोच
सुभदीप घोष टीम इंडिया के फील्डिंग कोच हैं. असम और रेलवे के लिए घरेलू क्रिकेट खेल चुके घोष को भारतीय क्रिकेट में कोचिंग का लंबा अनुभव है. सुभदीप घोष को टी दिलीप की जगह टीम इंडिया का फील्डिंग कोच बनाया गया है. जिम्बाब्वे दौरे के बाद टी दिलीप का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया गया था, जिसके बाद भारतीय टीम के फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी सुभदीप को मिली.

सितांशु कोटक, बल्लेबाजी कोच
सितांशु कोटक टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच हैं. सौराष्ट्र के पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट में लंबा अनुभव रहा है. उन्होंने 130 फर्स्ट क्लास मैचों में 8,061 रन बनाए, जिसमें 15 शतक और 55 अर्धशतक शामिल हैं. वह कभी भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेले, लेकिन घरेलू क्रिकेट में अपनी तकनीक और टिककर बल्लेबाजी करने के लिए पहचाने जाते थे.

साईराज बहुतुले, स्पिन गेंदबाजी कोच
साईराज बहुतुले टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी कोच हैं. पूर्व भारतीय लेग स्पिनर बहुतुले ने भारत के लिए 2 टेस्ट और 8 वनडे इंटरनेशनल मैच खेले हैं. घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा. उन्होंने 188 फर्स्ट क्लास मैचों में 6,176 रन बनाने के साथ 630 विकेट भी झटके.

मोर्ने मोर्कल, गेंदबाजी कोच
मोर्ने मोर्कल टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच हैं. दक्षिण अफ्रीका के इस पूर्व तेज गेंदबाज ने अपने 12 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में तीनों फॉर्मेट मिलाकर 247 मैच खेले और 544 विकेट हासिल किए. उन्होंने 86 टेस्ट में 309 विकेट, 117 वनडे में 188 विकेट और 44 टी20 इंटरनेशनल में 47 विकेट लिए. अपनी लगभग 1.96 मीटर लंबाई और अतिरिक्त उछाल हासिल करने की क्षमता के लिए मशहूर मोर्कल दुनिया के अनुभवी तेज गेंदबाजों में गिने जाते थे.

इनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं. बल्लेबाजी कोच खिलाड़ियों की तकनीक और शॉट चयन पर काम करते हैं, गेंदबाजी कोच लाइन-लेंथ और गेंदबाजी की योजनाओं पर ध्यान देते हैं, जबकि फील्डिंग कोच कैचिंग, थ्रो और मैदान पर चुस्ती बेहतर करने में जुटे रहते हैं.

इसके अलावा एड्रियन ले रूक्स स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच हैं. उनका काम खिलाड़ियों की शारीरिक तैयारी और फिटनेस को बेहतर बनाने से जुड़ा है. हर खिलाड़ी की भूमिका और जरूरत अलग होती है, इसलिए ट्रेनिंग की योजना भी उसी हिसाब से तैयार करनी पड़ती है.

एड्रियन ले रूक्स, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच
एड्रियन ले रूक्स टीम इंडिया के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच हैं. दक्षिण अफ्रीका के स्पोर्ट्स साइंटिस्ट ले रूक्स का काम खिलाड़ियों की ताकत, फिटनेस, सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाना है, ताकि वे लगातार मैचों और लंबे दौरों के दबाव को झेल सकें. वह इससे पहले 2002 से 2003 तक भी भारतीय टीम के फिटनेस कोच रह चुके हैं.

डॉक्टर, फिजियो और मसाजर… फिटनेस का मोर्चा भी अहम
लंबे अंतरराष्ट्रीय दौरें खिलाड़ियों को लगातार यात्रा करनी पड़ती है. मैचों के बीच आराम, अभ्यास और रिकवरी के लिए समय निकालना भी बड़ी चुनौती होता है. ऐसे में टीम के मेडिकल और फिजिकल सपोर्ट स्टाफ की भूमिका अहम हो जाती है.

टीम डॉक्टर डॉ. चार्ल्स मिंज के साथ हेड फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन और फिजियोथेरेपिस्ट योगेश परमार भी सूची में शामिल हैं. नंदन माजी और चेतन कुमार मसाजर के तौर पर टीम से जुड़े हैं.

डॉ. चार्ल्स मिंज, टीम डॉक्टर
डॉ. चार्ल्स मिंज टीम इंडिया के डॉक्टर हैं और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के चीफ मेडिकल ऑफिसर के तौर पर भी काम कर चुके हैं. वह पेशे से जनरल फिजिशियन हैं. मिंज इससे पहले IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के साथ काम कर चुके हैं.

कमलेश जैन, हेड फिजियोथेरेपिस्ट
कमलेश जैन टीम इंडिया के हेड फिजियोथेरेपिस्ट रहे हैं. उन्होंने जून 2022 में भारतीय सीनियर टीम के साथ काम शुरू किया था. इससे पहले वह करीब 10 साल तक IPL फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से जुड़े रहे, जहां 2020 में हेड फिजियो की जिम्मेदारी संभाली. हालांकि, सितंबर 2026 में उनके पद से हटने की खबरें आई थीं और न्यूजीलैंड दौरा उनके कार्यकाल का आखिरी दौरा हो सकता है.

योगेश परमार, फिजियोथेरेपिस्ट
योगेश परमार टीम इंडिया के फिजियोथेरेपिस्ट हैं और लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के सेटअप से जुड़े रहे हैं. वह बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में काम कर चुके हैं और भारत की अंडर-19 तथा इंडिया-A टीमों के साथ भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. NCA से पहले वह इंग्लैंड के एसेक्स काउंटी क्लब और IPL फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियंस से भी जुड़े रहे.

नंदन माजी, मसाजर
नंदन माजी टीम इंडिया के मसाजर हैं. वह भारतीय टीम के खिलाड़ियों की मांसपेशियों को आराम देने और थकान से उबरने में मदद करते हैं. मसल्स रिकवरी और शारीरिक थकान कम करने के लिए मसाज की भूमिका अहम होती है, खासकर लगातार मैच खेलने और लंबे दौरों के दौरान.

चेतन कुमार, मसाजर
इन विशेषज्ञों का काम खिलाड़ियों की शारीरिक जरूरतों के मुताबिक सहायता देना, चोट की स्थिति में मेडिकल टीम के साथ काम करना और मैचों के बीच रिकवरी में मदद करना है. हालांकि, किसी खिलाड़ी की चोट या फिटनेस पर अंतिम फैसला मेडिकल आकलन और टीम प्रबंधन की प्रक्रिया के आधार पर ही होता है.

ट्रेनिंग असिस्टेंट से लॉजिस्टिक्स मैनेजर तक, हर जिम्मेदारी के लिए अलग व्यक्ति
बीसीसीआई की सूची में ट्रेनिंग असिस्टेंट के तौर पर दयानंद गरानाई, उदेनाका नुवान और राघवेंद्र दुगी के नाम हैं. टीम ऑपरेशन मैनेजर सुमीत और लॉजिस्टिक्स मैनेजर खाजा मुबास्सिरुद्दीन भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं.

दयानंद गरानाई, ट्रेनिंग असिस्टेंट
दयानंद गरानाई टीम इंडिया के ट्रेनिंग असिस्टेंट हैं और बल्लेबाजों को तेज गेंदबाजी के खिलाफ अभ्यास कराने वाले थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के तौर पर भी काम करते हैं. पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के जमटिया गांव के रहने वाले गरानाई के पिता किसान हैं. क्रिकेटर बनने का सपना पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने कोलकाता पुलिस में सिविक पुलिस वॉलंटियर के तौर पर काम किया. इसके साथ ही वह क्लब क्रिकेट में मीडियम पेसर भी रहे.

उदेनाका नुवान, ट्रेनिंग असिस्टेंट
उदेनाका नुवान श्रीलंका के रहने वाले हैं और भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में ट्रेनिंग असिस्टेंट की भूमिका निभाते हैं. वह नेट्स में बल्लेबाजों के अभ्यास में मदद करने और थ्रोडाउन के जरिए उन्हें तेज गेंदों का सामना करने की तैयारी कराने वाले सहयोगी स्टाफ का हिस्सा हैं.

राघवेंद्र दुगी, ट्रेनिंग असिस्टेंट
राघवेंद्र दुगी, जिन्हें टीम इंडिया में ‘रघु’ के नाम से जाना जाता है, भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट हैं. रघु नेट्स में साइडआर्म उपकरण की मदद से बल्लेबाजों को तेज रफ्तार से गेंदें डालते हैं, ताकि वे मैच में तेज गेंदबाजों का सामना करने के लिए तैयार रहें. उनकी गेंदों की रफ्तार 150-155 किमी प्रति घंटे तक बताई गई है. विराट कोहली ने भी तेज गेंदबाजी के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों के खेल में सुधार का श्रेय रघु के अभ्यास सत्रों को दिया है.

किसी अंतरराष्ट्रीय दौरे में खिलाड़ियों की तैयारी के साथ यात्रा, ठहरने, अभ्यास और अन्य व्यवस्थाओं का तालमेल भी जरूरी होता है. अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने वाले लोग इन व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने में मदद करते हैं, ताकि खिलाड़ियों और कोचों का ध्यान क्रिकेट पर केंद्रित रह सके.

खाजा मुबास्सिरुद्दीन, लॉजिस्टिक्स मैनेजर
टीम के परफॉर्मेंस एनालिस्ट हरि प्रसाद मोहन भी सूची में शामिल हैं. आधुनिक क्रिकेट में वीडियो फुटेज, आंकड़ों और प्रदर्शन से जुड़े विश्लेषण का इस्तेमाल रणनीति बनाने में किया जाता है. विरोधी टीम की ताकत और कमजोरियों को समझने से लेकर अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा तक, डेटा की भूमिका लगातार बढ़ी है.

हरि प्रसाद मोहन, परफॉर्मेंस एनालिस्ट
12 मैचों का दौरा, तीनों फॉर्मेट में तैयारी की चुनौती
भारत का न्यूजीलैंड दौरा तीनों फॉर्मेट में कुल 12 मैचों का है. ऐसे लंबे दौरे में खिलाड़ियों की फिटनेस, कार्यभार और तैयारी का प्रबंधन अहम हो जाता है. टी20 में जहां तेजी से रन बनाने और सीमित समय में रणनीति लागू करने पर जोर रहता है, वहीं वनडे और टेस्ट क्रिकेट की जरूरतें अलग होती हैं.

इसी वजह से टीम की तैयारी में कोचिंग, ट्रेनिंग, मेडिकल सहायता और विश्लेषण का तालमेल मायने रखता है. हालांकि,

इतने बड़े सपोर्ट स्टाफ की मौजूदगी अपने आप में जीत की गारंटी नहीं है. आखिरकार मैदान पर प्रदर्शन खिलाड़ियों को ही करना होता है.

1983 से 2026 तक, बदल गया क्रिकेट का पूरा गणित
1983 की विश्व कप विजेता टीम की उपलब्धि आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है. उस दौर में सीमित संसाधनों के बीच कपिल देव और उनके साथियों ने इतिहास रचा था. आज की टीम इंडिया के पास आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ कोच और व्यापक सपोर्ट सिस्टम है.

दोनों दौर की तुलना का मकसद किसी एक व्यवस्था को बेहतर या कमजोर बताना नहीं, बल्कि यह समझना है कि क्रिकेट कितना बदल चुका है. तब टीम मैनेजर को कई व्यवस्थागत जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती थीं. आज काम का बंटवारा विशेषज्ञों के बीच है और खिलाड़ियों की तैयारी कहीं ज्यादा व्यवस्थित हो गई है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button