दृश्यम 3 में 2 अक्टूबर नहीं, 23 जुलाई बनी सबसे बड़ी तारीख, विजय सलगांवकर के सामने फिर संकट

डियन सिनेमा की सबसे थ्रिलिंग फिल्म फ्रैंचाइजी 'दृश्यम' एक बार फिर ऑडियंस का दिमाग घुमाने आ चुकी है. मलयालम वर्जन से परे होकर अजय देवगन इसका हिंदी वर्जन 'दृश्यम द कन्क्लूजन' लाए हैं जो एक ओरिजिनल कहानी है. सिनेमाघरों में ये रिलीज हो गई है. इस बार हिंदी में दृश्यम की कहानी खत्म हो चुकी है. विजय सलगांवकर और पुलिस के बीच हुए इस आंख-मिचोली के खेल का अंत हुआ है.
'दृश्यम द कन्क्लूजन' या कहें दृश्यम 3 एक फ्रेश कहानी और दिमाग घुमाने वाले ट्विस्ट के साथ लौटी है. पिछले पार्ट के बाद, जहां हमें लगा कि विजय सलगांवकर की फैमिली पर खतरा अब टल गया है. वहीं एक नए किरदार की एंट्री से वो चीज वापस आ जाती है. साथ ही एक नई तारीख भी इस आंख-मिचोली के खेल में शामिल होती है, जिसके इर्द-गिर्द फिल्म में मिस्ट्री का खेल शुरू होता है. 2 अक्टूबर के बाद, विजय के परिवार पर 23 जुलाई के दिन क्या हुआ था इसपर सस्पेंस बन चुका है.
जिन लोगों ने फिल्म 'दृश्यम द कन्क्लूजन' देख ली है, वो मेरी इस बात को आसानी से समझ गए होंगे. लेकिन जिन्होंने भी अभी तक फिल्म नहीं देखी है, तो आपके लिए एक बड़ा SPOILER ALERT है. इसके आगे आप तभी पढ़िएगा, जब आपको तीसरी फिल्म की कहानी पता हो.
दृश्यम फ्रैंचाइजी में 2 अक्टूबर के दिन का कितना महत्व है, ये बताने की जरूरत नहीं. सलगांवकर फैमिली इसी दिन गोवा के पणजी गई, वहां पाव-भाजी खाई और सतसंग में हिस्सा लिया. पॉप कल्चर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती नहीं, बल्कि दृश्यम जयंती बताया जाता है. जब भी इस तारीख का जिक्र उठता है, सोशल मीडिया पर फिल्म के मीम्स बनने शुरू हो जाते हैं. मगर 'दृश्यम द कन्क्लूजन' ने इस तारीख को अब बदलकर 23 जुलाई का दिन सबसे खास और महत्वपूर्ण बना दिया है.
दरअसल दृश्यम 3 का पूरा प्लॉट इसी तारीख पर आकर अटका है. ये वो दिन है, जब विजय सलगांवकर ने सैम के कंकाल को फोरेंसिक लैब से निकालकर एक दूसरी बॉडी के कंकाल के साथ बदल दिया था. दृश्यम 2 में ये एक बहुत बड़ा ट्विस्ट था, जिसके दम पर विजय और उसका परिवार कोर्ट से बरी हुआ था. मगर फिर तीसरे पार्ट में क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर की एंट्री से ये केस वापस खुला. उसे विजय और उसकी फैमिली के खिलाफ एक बड़ा ठोस सबूत मिला, जिसके दम पर वो उन्हें वापस कोर्ट में घसीटता है.
23 जुलाई की रात विजय सलगांवकर ने जो कुछ सैम की बॉडी के साथ किया, उसका एक हिस्सा एसपी राजवीर तोमर के हाथ लगता है. इसी के दम पर मीरा और उसके पति महेश विजय से बदला लेने की ठान लेते हैं. उस रात से जुड़े ठोस सबूत के चलते, इस बार भी विजय का परिवार कटघरे में आकर खड़ा होता है. अब क्या वो अंत में बचकर निकलता है, या उसे इस लड़ाई में हार मिलती है? ये आप फिल्म देखकर ही पता लगाइए. इसे अभिषेक पाठक ने डायरेक्ट किया है, जो दृश्यम 2 के भी डायरेक्टर थे.











