भोपाल पश्चिमी बायपास की पर्यावरण रिपोर्ट पर सवाल, सागर बायपास का कंटेंट कॉपी-पेस्ट करने का आरोप

भोपाल
भोपाल रिंग रोड को पूरा करने वाला करीब 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट में भी इंजीनियरों का हैरतअंगेज खेल सामने आया है। भोपाल, नर्मदापुर, नागपुर, जबलपुर और इंदौर जाने वालों के लिए 25 किमी तक की दूरी कम करने वाले पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट बनाने में ही जिम्मेदारों ने बड़ी लापरवाही कर दी। रतनपुर से फंदा तक 36 किमी लंबे पश्चिमी बायपास के प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय रिपोर्ट में सागर के बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट को कॉपी पेस्ट कर पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट तैयार कर दी गई। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही रिपोर्ट्स में ऐसी ही गलतियां हैं। इस रिपोर्ट के ड्राफ्ट पर आपत्तियां ली जा रही हैं। 25 सितंबर को इस पर आमला गांव में सुनवाई होगी। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा।
सामने आ रही अफसरों की लापरवाही
बता दें, पर्यावरणीय कारणों से ही प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट एक बार बदला गया था। 4 किमी की लंबाई घटाकर 40 किमी से 36 किमी का किया। इसमें भी पर्यावरणीय रिपोर्ट की गड़बड़ी और सागर जिले के उल्लेख से अफसरों की लापरवाही सामने आ रही है। अब प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एमपीआरडीसी के एजीएम एसपी दुबे का कहना है कि गड़बड़ी दिखवा लेंगे। भोपाल रिंग रोड प्रोजेक्ट, जिसे मुख्य रूप से भोपाल पश्चिमी बायपास (Bhopal Western Bypass) के रूप में जाना जाता है। भोपाल के ट्रैफिक को शहर के बाहर से ही डायवर्ट करने के लिए बनाई जा रही एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है।
ऐसे समझें प्रोजेक्ट रिपोर्ट में गड़बड़ियां
-हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 1.7 में पर्यावरण प्रबंधन योजना में पर्यावरण संरक्षण के उपाय के लिए अंकों में बजट 05 करोड़ 12 हजार 722 रुपए लिखे हैं। जबकि शब्दों में चौबीस करोड़ छह लाख दो हजार आठ सौ नब्बे रुपए लिखा गया है।
-हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 15 में पर्यावरण निगरानी कार्यों के लिए अंकों में 10,64,000 रुपए लिखे हैं। शब्दों इसे सात लाख छप्पन हजार रुपए लिखा।
-अंग्रेजी की रिपोर्ट में टेबल 1.2 की एन्वायरमेंटल लेजिसलेशंस में 3 नंबर पर लिखा है, प्रोजेक्ट अलाइनमेंट इज पासिंग थू रिजर्ल्ड एंड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट ऑफ एबाउट 47 हेक्टेयर लेंथ 6058 मीटर डिस्ट्रिक्ट सागर इन स्टेट ऑफ एमपी। जाहिर है, ये सागर जिले की सड़क की बात है।











