
बहादुरगढ़
धान उत्पादक किसान इस बार आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।
समय पर रोपाई या बिजाई की गई धान की फसल फिलहाल संभली हुई है, लेकिन उसे बचाए रखने के लिए किसान दिन-रात ट्यूबवेल चला रहे हैं।
दूसरी ओर, पिछैती रोपाई वाले खेतों में सूखे का असर पहले ही दिखाई दे चुका है। कहीं फसल की जुताई की जा चुकी है तो कहीं किसान उसे पशु चारे के लिए काटने को मजबूर हैं।
बहादुरगढ़ क्षेत्र में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। मानसून कमजोर रहने और लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
समय पर रोपी गई फसल की स्थिति ठीक
समय पर रोपी गई फसल की स्थिति अभी अपेक्षाकृत ठीक है, मगर इसके लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत के समय नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है।
इससे डीजल और बिजली के साथ सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। किसान आनंद के अनुसार, पिछले सप्ताह तीन-चार दिन बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई।
तापमान बढ़ने के साथ पानी की जरूरत और बढ़ गई है। यदि ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं की जाए तो फसल पर असर पड़ने का डर है।
क्या इस बार बचेगा मुनाफा?
लगातार सिंचाई के बावजूद इस बात की चिंता है कि अंत में उत्पादन कितना होगा और बढ़ी हुई लागत के बाद हाथ में मुनाफा कितना बचेगा।
पिछैती रोपाई वाली फसल पर संकट सूखे की सबसे ज्यादा मार पिछैती रोपाई वाली फसल पर पड़ी है। मौसम में अगले एक-दो दिन में बदलाव और बारिश की संभावना से किसानों को उम्मीद बंधी है।
अब देखना यह है कि आसमान से कितनी राहत मिलती है और खेतों में खड़ी धान की फसल किसानों की उम्मीद को उत्पादन और मुनाफे में कितना बदल पाती है। इधर, कृ़षि विभाग के एसडीओ डा. सुनील कौशिक ने बताया कि अभी फसल की स्थिति ठीक है।











