मध्य प्रदेश

CM मोहन यादव का पहला चिंतन शिविर, सितंबर में मंत्रियों संग दो दिन करेंगे मंथन

भोपाल 
 ढाई साल में विभागों ने कौन-कौन से महत्वपूर्ण काम किए, कितने रह गए और उनके क्या परिणाम आए, इसकी सभी मंत्री दो दिन का विभागीय चिंतन शिविर आयोजित करके समीक्षा करें। यह शिविर सितंबर में किए जाएं। इसमें आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हो और उनके क्रियान्वयन की कार्य योजना बने। यह निर्देश मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने मंत्रियों को कैबिनेट की बैठक से पहले दिए।

शनिवार को भी हो सकता है जनविश्वास अभियान
    साथ ही यह भी कहा कि विशेष पर्व और त्योहारों के चलते अगर शुक्रवार को अवकाश रहता है तो जनविश्वास अभियान अगले दिन यानी शनिवार को आयोजित किया जाए। सभी कलेक्टर अभियान के संबंध में पहले से

    जानकारी दें ताकि नागरिकों के साथ कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को भी तैयारी के लिए समय मिल सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि जन विश्वास अभियान के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इससे सतत रखा जाएगा।

निवेश का महाभियान और स्टार्टअप को बढ़ावा
    साथ ही बताया कि प्रदेश में निवेश का महाभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। जुलाई में आदित्य टेक्नो कंपनी, लियोन इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास हुआ है। इसी प्रकार पीथमपुर में 850 करोड़ रुपए लागत की दो नई इंडस्ट्रीज का शुभारंभ किया गया।

ग्वालियर में टेलीकाम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए दिल्ली में हुए रोड शो में पांच हजार करोड़ रुपये और अहमदाबाद में हुए रोड शो में 8,635 करोड रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। स्पेस टेक्नोलाजी क्षेत्र में सेटेलाइट लांचिंग के लिए विदिशा निवासी विभोर जैन को भी अवसर मिला है। उनकी स्टार्ट-अप कंपनी व्योमिक भी अंतरिक्ष में सेटेलाइट लांच करने की तैयारी कर रही है।

कलेक्टर-कमिश्नर से सीधे सवाल करेंगे मंत्री
इस बार चिंतन शिविर में जमीनी स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया जा रहा है। जिलों के कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर के अलावा विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव (PS) भी शिविर में मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंशा है कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों की वास्तविक स्थिति पर अधिकारियों के साथ सीधे चर्चा करें। स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल-जवाब भी किए जाएंगे।

पचमढ़ी की जगह भोपाल में होगा आयोजन
पहले सरकारों के चिंतन शिविर राजधानी से दूर पचमढ़ी जैसे स्थानों पर आयोजित होते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2022 में पचमढ़ी में चिंतन शिविर आयोजित किया था। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आयोजन भोपाल में ही कराने का फैसला किया है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्च में बचत करना बताया जा रहा है। राजधानी में आयोजन होने से मंत्रियों और अधिकारियों के ठहरने, यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।

2027 के चुनावों को लेकर भी बनेगी रणनीति
चिंतन शिविर में आगामी चुनावों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। वर्ष 2027 में मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव और इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश के बाद छात्र संघ चुनाव तथा सहकारिता, मंडी और जल उपभोक्ता संस्थाओं के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चुनावी तैयारियों को लेकर भी रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में हो सकता है बदलाव
चिंतन शिविर के बाद मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है। लंबे समय से कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों को बदलने की मांग कर रहे हैं। कुछ मंत्रियों के प्रभार वाले जिले उनकी विधानसभा सीट से 500 से 1000 किलोमीटर तक दूर हैं। इतनी अधिक दूरी के कारण जिलों के नियमित प्रवास और निगरानी में दिक्कतें सामने आती हैं। माना जा रहा है कि शिविर में समीक्षा के बाद सरकार मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव पर फैसला ले सकती है।

जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा करें
    उन्होंने कहा कि प्रदेश में मानसून का अंतिम दौर चल रहा है। अत्यधिक बारिश होने से कई नगरीय निकायों और पंचायत क्षेत्रों में नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे गलियों और घरों में पानी भर जाता है।

    जल निकासी की व्यवस्था की समीक्षा करें और वर्षा ऋतु के बाद अभियान चलाकर नालों के प्रवाह को निर्बाध बनाने के लिए कार्य योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

    किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सभी जनप्रतिनिधि किसानों को इसे बनवाने के लिए प्रेरित करें।

 

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