रांची में बनेंगे 3 स्मार्ट पावर ग्रिड, अगले 10 साल तक बिजली संकट से मिलेगी राहत

रांची.
राजधानी में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए कुसई कालोनी, बरियातू और इटकी में तीन नए स्मार्ट ग्रिड बनाने की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन ग्रिड के निर्माण के बाद शहर और आसपास के इलाकों में अगले करीब 10 वर्षों तक बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। तीनों ग्रिड को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा।
वहीं, प्रस्ताव के अनुसार, इटकी में 400/220/132/33 केवी, कुसई कॉलोनी में 220/33 केवी तथा बरियातू में 132/33 केवी का स्मार्ट ग्रिड बनाया जाएगा। बरियातू और कुसई कालोनी में बनने वाले ग्रिड की क्षमता करीब 200-200 मेगावाट होगी। वहीं इटकी में प्रस्तावित ग्रिड की क्षमता इन दोनों ग्रिडों से अधिक रखी जाएगी।
एआई और स्काडा सिस्टम से होंगे लैस
तीनों स्मार्ट ग्रिड को एआई तकनीक से लैस किया जाएगा। इन्हें सीधे स्काडा सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रिड के पैनल, यार्ड, इंसुलेटर, वायर सहित अन्य उपकरणों में किसी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसकी जानकारी सिस्टम पर तत्काल मिल सकेगी। इससे फॉल्ट की पहचान करने और उसे जल्द दुरुस्त करने में सुविधा होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
जमीन की जा चुकी है चिन्हित
स्मार्ट ग्रिड निर्माण के लिए बरियातू के डॉक्टर कालोनी, कुसई कालोनी मैदान और इटकी में जमीन चिन्हित कर ली गई है। हालांकि, अभी परियोजना की कुल लागत स्पष्ट नहीं है। इंजीनियरों के अनुसार कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद डीपीआर तैयार किया जाएगा। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने पर तीनों ग्रिड की वास्तविक लागत सामने आएगी।
पांच साल में दोगुनी हो सकती है मांग
रांची ट्रांसमिशन के महाप्रबंधक एके भारतीयम ने बताया कि राजधानी में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। हर महीने लोड में वृद्धि हो रही है। राजधानी होने के कारण यहां आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। वर्तमान में गर्मी के दिनों में रांची जिले में करीब 500 मेगावाट बिजली की मांग रहती है। आने वाले पांच वर्षों में यह मांग बढ़कर लगभग दोगुनी हो सकती है। इसी भविष्य की जरूरत को देखते हुए तीन नए स्मार्ट ग्रिड बनाने की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन ग्रिडों के अस्तित्व में आने के बाद बढ़ते लोड को संभालने के साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा सकेगा।











