
जयपुर
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया बुधवार को अंतिम चरण के करीब पहुंच गई। विधिक परीक्षण के बाद विधि विभाग ने इसे मंजूरी के लिए विधि मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेज दिया। विधि मंत्री की मंजूरी के बाद विधेयक को कैबिनेट में भेजा जाएगा।
बताते चलें कि बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने विधेयक का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया था, जिसे गृह विभाग ने विधिक परीक्षण के लिए सोमवार को विधि विभाग को भेज दिया था। विधि विभाग में सोमवार को देर रात तक विधिक परीक्षण का कार्य चलता रहा और मंगलवार को परीक्षण का कार्य जारी रहा।
करीब 200 पेज का होगा विधेयक
विधेयक का ड्राफ्ट करीब दो सौ पेज का बताया जा रहा है, जिसे अब तक यूसीसी को अंतिम रूप दे चुके राज्यों के कानून व विधेयकों के अध्ययन व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश और आम जनता से मिले सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया।
कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक होगा महत्वपूर्ण एजेंडा
राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के मंत्रिमंडल कक्ष में होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकता है।
कई राज्यों के कानूनी प्रावधानों का किया अध्ययन
उत्तराखंड में यूसीसी लागू है, जबकि गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है। लेकिन अभी कानून का रूप नहीं ले सका है। राजस्थान के विधेयक के लिए समिति ने उत्तराखंड व गुजरात राज्यों के कानूनी प्रावधानों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया है। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक कारणों से आदिवासियों को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।
UCC यानी Uniform Civil Code ऐसा कानून/कानूनी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान नियम लागू करना है। इसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम, सभी समुदायों के लिए एक जैसी कानूनी प्रक्रिया, महिला और पुरुष के अधिकारों में समानता का प्रावधान, विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है, UCC में इसे प्रतिबंधित करने का प्रावधान हो सकता है और संबंधित कानून में पंजीकरण और अन्य नियम बनाए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि UCC का मतलब यह नहीं है कि सभी धर्मों के धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत नागरिक कानूनों के उन हिस्सों में समान कानूनी नियम बनाना है, जो नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों से जुड़े हैं।











