
चंडीगढ़
हरियाणा के शहर अब कबाड़ से नई पहचान गढ़ेंगे। प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में ''वेस्ट टू वंडर पार्क'' विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर दिया है।
इन पार्कों में औद्योगिक कचरे, लोहे की चादरों, नट-बोल्ट, पुरानी गाड़ियों और उनके पार्ट्स सहित अन्य अनुपयोगी सामग्री से देश-दुनिया के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों और अजूबों की आकर्षक प्रतिकृतियां तैयार की जाएंगी। इससे एक ओर अपशिष्ट के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शहरों को नए पर्यटन और मनोरंजन केंद्र भी मिलेंगे
स्थानीय निकाय एवं राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने बुधवार को अधिकारियों के साथ अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में सभी जिलों के लिए वेस्ट टू वंडर पार्क की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पहले चरण में गुरुग्राम में ऐसा पार्क विकसित किया जा रहा है और उसके माडल को प्रदेश के अन्य नगर निकायों में भी लागू किया जाएगा।
बैठक में शहरी विकास से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी मंथन हुआ। मंत्री ने शहरी क्षेत्रों की सब्जी मंडियों में मल्टीलेवल पार्किंग विकसित करने, पुराने नगर निगम कार्यालयों को आधुनिक वाणिज्यिक परिसरों में बदलने तथा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) क्षेत्रों और गुरुग्राम की पुरानी कालोनियों में पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ करने के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में पंचकूला के नग्गल में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, जगाधरी के पुराने एमसी कार्यालय परिसर में शापिंग कांप्लेक्स और कन्वेंशन-कम-बैंकेट हाल विकसित करने तथा पानीपत स्थित आइओसीएल परिसर में वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट के लिए एसटीपी स्थापित करने संबंधी प्रस्तावों पर भी कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा फरीदाबाद के अरावली गोल्फ कोर्स के उन्नयन, मल्टीलेवल पार्किंग और कामर्शियल कांप्लेक्स विकसित करने के साथ-साथ गोंची ड्रेन और बुढ़िया नाले के पुनर्विकास की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को नई गति देना है।











