अजाक्स भवन भोपाल में कथित अवैध कब्जा, तोड़फोड़ एवं आपराधिक घटनाक्रम पर सख्त कार्रवाई की मांग

अजाक्स भवन भोपाल में कथित अवैध कब्जा, तोड़फोड़ एवं आपराधिक घटनाक्रम पर सख्त कार्रवाई की मांग
अजाक्स ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्राधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल एफआईआर एवं वैधानिक कार्रवाई की मांग
अजाक्स ने जिला कलेक्ट्रेट में सौंपे ज्ञापन
असमाजिक लोगों के विरुद्ध अजाक्स में आक्रोश
ग्वालियर
म.प्र.अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के प्रांतीय सचिव होतम सिंह मौर्य के नेतृत्व में ग्वालियर में ग्वालियर कलेक्ट्रेट पर पहुंच कर ज्ञापन दिया गया जिसमें माँग करते हुए बताया कि प्रांतीय कार्यालय अजाक्स भवन भोपाल में कथित अवैध प्रवेश, ताला तोड़कर कब्जा, तोड़फोड़, साक्ष्य नष्ट करने, संगठन के पदाधिकारियों एवं चौकीदारों को जान से मारने की धमकी देने तथा न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के बावजूद भवन पर बलपूर्वक कब्जा किए जाने के संबंध में भारत के महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त भोपाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त टी.टी. नगर, थाना प्रभारी टी.टी. नगर सहित संबंधित अधिकारियों को कलेक्टर ग्वालियर के माध्यम से एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव को ज्ञापन सौंपा गया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 20 मार्च 2026 से लगातार विभिन्न सक्षम अधिकारियों को शिकायतें एवं आवेदन प्रस्तुत किए जाते रहे, किन्तु प्रभावी वैधानिक कार्रवाई न होने के कारण दिनांक 11एवं 12 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि लगभग 12:10 बजे 20 से 25 असामाजिक तत्वों को साथ लेकर मुकेश मौर्य कथित रूप से चेहरा ढककर गैती,फावड़ा एवं सब्बल एवं सरिया तथा अवैध हथियारों के साथ अजाक्स भवन में जबरन प्रवेश किया । उक्त असामाजिक लोगों में मुकेश मौर्य, योगेश दण्डोतिया, मोनू मौर्य एवं राजपाल वाहने सहित अन्य व्यक्तियों सामिल थे .
ज्ञापन के अनुसार कथित रूप से भवन का मुख्य ताला तोड़ा गया, चौकीदारों को धमकाया गया, सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए तथा डीवीआर हटाकर अथवा नष्ट कर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया। साथ ही मंच पर लगे परम पूज्य बाबा साहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी एवं भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्रों को चाकू से काटकर क्षतिग्रस्त किया गया ,भवन में स्थापित लोकार्पण, दानदाताओं एवं पदाधिकारियों की शिलापट्टिकाओं को तोडकर उखाड़ने,संगठन के अभिलेखों एवं अन्य संपत्ति को नुकसान पहुँचाने तथा संगठन के पदाधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने एवं जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।
उक्त घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दिए जाने के बावजूद समय पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप भवन पर कथित रूप से बलपूर्वक कब्जा कर लिया गया। संगठन ने इसे कानून के शासन, सार्वजनिक व्यवस्था तथा संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध गंभीर घटना बताया है।
संवैधानिक एवं विधिक आधार पर ज्ञापन में कहा गया है कि कथित घटनाक्रम भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता), अनुच्छेद 19(1)(c) (संगठन बनाने का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 300A (विधि के प्राधिकार के बिना संपत्ति से वंचित न किए जाने का अधिकार) की भावना के प्रतिकूल है।
साथ ही संगठन ने कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत आपराधिक अतिक्रमण, गृह-अतिचार, बलपूर्वक अनाधिकृत प्रवेश, संपत्ति को क्षति पहुँचाना, आपराधिक धमकी, अवैध जमाव, दंगा (यदि बल प्रयोग सिद्ध हो), साक्ष्य नष्ट करने तथा आपराधिक षड्यंत्र जैसे अपराध प्रथम दृष्टया परिलक्षित होते हैं। ज्ञापन में अनुरोध किया गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उपयुक्त धाराओं का निर्धारण कर वैधानिक कार्रवाई करे।
इसके अतिरिक्त भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर एफआईआर दर्ज करना, घटनास्थल का निरीक्षण करना, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित करना, गवाहों के बयान दर्ज करना तथा विधि अनुसार अनुसंधान करना पुलिस का वैधानिक दायित्व है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2013) के निर्णय के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है और पुलिस इसे विवेकाधीन आधार पर टाल नहीं सकती।
संगठन की प्रमुख मांगें
संगठन ने मांग की है कि—
तत्काल एफआईआर दर्ज कर सभी नामजद एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।
अजाक्स भवन से कथित अवैध कब्जा हटाकर वैधानिक कब्जा संगठन को दिलाया जाए।
भवन की सुरक्षा हेतु पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए।
सीसीटीवी, डीवीआर एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
भवन को हुई क्षति का पंचनामा तैयार कर दोषियों से क्षतिपूर्ति कराई जाए।
चौकीदारों एवं संगठन के पदाधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
यदि शिकायतों की उपेक्षा में किसी पुलिस प्रशासन के अधिकारी की भूमिका पाई जाती है तो उसकी विभागीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण को दृष्टिगत रखते हुए विधि सम्मत स्थिति बनाए रखी जाए तथा न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
संगठन ने कहा है कि वह संविधान, विधि के शासन एवं न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास रखता है तथा अपेक्षा करता है कि सक्षम प्राधिकारी उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
ज्ञापन का वाचन अजाक्स के संभागीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जाटव ने किया एवं आभार कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अतर सिंह जाटव एवं जिला सचिव राजेंद्र पक्षबार ने व्यक्त किया!
इस अवसर पर मुख्य रुप से प्रांतीय सचिव होतम सिंह मौर्य, प्रांतीय संयुक्त सचिव शैलेन्द्र कदम, संभागीय संरक्षक शांतिप्रकाश राजौरिया, संभागीय अध्यक्ष इंजी केवी दोहरे, जिलाध्यक्ष विजय कुमार पिपरोलिया, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अतर सिंह जाटव,संभागीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जाटव,तरुण राजौरिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एन डी मौर्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र जयंत, जिला सचिव राजेंद्र पक्षवार, जिला महासचिव झड़ा सिंह गोयल ओ पी सिंह, कोषाध्यक्ष मनीराम कटोरिया, जिला सचिव फूलसिंह बमरोलिया, जी एस गौतम, ग्वालियर छात्र इकाई जिलाध्यक्ष ममता जामरा, ब्लाक अध्यक्ष डॉ कुसुम इंदौरिया, राममूर्ति सेंगर, एलिसा, शशिकांत जाटव, जे पी गर्ग, जितेंद्र कंसोटिया, ओपी केन, सुरेंद्र पिप्पल, वीरेंद्र सोन, हरिकेश माहौर, सोवरन शाक्य, लक्ष्मण जाटव,प्रो. करण सिंह, ज्वाला प्रसाद, रामकुमार दंडोतिया, होतम माथुर, अरविंद सिंह,वीरेंद्र वर्मा, विनोद दोहरे मूर्तिराम बाथम एवं सैकडों की संख्या में अजाक्स अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे











