
गुरुग्राम
देश की राजधानी होने के चलते दिल्ली का महत्व काफ बढ़ जाता है. यहां विभिन्न प्रांतों के लोग हजारों-लाखों की तादाद में रहते हैं. कोई रोजगार के तलाश में तो कोई हायर एजुकेशन के सिलसिले में दिल्ली और आसपास के शहरों में रहते हैं. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि लाखों लोग रोजाना आरामदायक तरीके से सफर कर सकें. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. इस रोड-टनल प्रोजेक्ट के पूरा होने से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे तक जाना और आना काफी आसान हो जाएगा. इसके अलावा साउथ से लेकर वेस्ट और ईस्ट दिल्ली तक की यात्रा भी बिना जाम के पूरा किया जा सकेगा। दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच यातायात को तेज, सुगम और सिग्नल-फ्री बनाने की दिशा में केंद्र सरकार जल्द एक बड़ा फैसला ले सकती है. केंद्र सरकार की केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) बहुप्रतीक्षित करीब 7,000 करोड़ रुपये की उस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे सकती है, जिसके तहत वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग को दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के शिव मूर्ति इंटरचेंज से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक टनल और उससे जुड़े संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे. इस परियोजना में टनल के अलावा फ्लाईओवर, एलिवेटेड यू-टर्न और अप्रोच रोड्स भी शामिल होंगे, जिससे आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3, गुरुग्राम और द्वारका एक्सप्रेसवे तक पहुंच काफी आसान हो जाएगी।
करीब पांच साल से अधिक समय से विचाराधीन इस परियोजना को अब निर्णायक चरण में माना जा रहा है. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC), जो निजी निवेश वाली परियोजनाओं का मूल्यांकन करने वाली शीर्ष समिति है, इस प्रोजेक्ट की सिफारिश कर चुकी है. अब इसे जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने PPPAC को दी अपनी प्रस्तुति में बताया है कि नेल्सन मंडेला मार्ग से शिव मूर्ति इंटरचेंज तक 6 लेन की टनल बनाई जाएगी. यह टनल पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच तेज कनेक्टिविटी का नया गलियारा बनेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यूनिफाइड एक्सेस रोड-II (UER-II) और द्वारका एक्सप्रेसवे से आने-जाने वाला ट्रैफिक सीधे वसंत कुंज और दक्षिण दिल्ली से जुड़ सकेगा. साथ ही गुरुग्राम और आईजीआई एयरपोर्ट से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
NHAI ने इस परियोजना के महत्व को बताते हुए ट्रैफिक का विस्तृत अनुमान भी पेश किया है. उसके अनुसार, इस कॉरिडोर पर फिलहाल करीब 38,015 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) प्रतिदिन का दबाव है, जो वर्ष 2053 तक बढ़कर लगभग 1.3 लाख PCU प्रतिदिन तक पहुंच सकता है. ऐसे में भविष्य की यातायात जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना सिर्फ वर्तमान समस्या का समाधान नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए दिल्ली के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी भी है।
टनल परियोजना सिर्फ भूमिगत संपर्क तक सीमित नहीं होगी. NHAI ने बताया है कि नेल्सन मंडेला मार्ग की ओर टनल के निकास बिंदु से आगे एक छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर भी प्रस्तावित है. यह कॉरिडोर महिपालपुर-छतरपुर चौराहे के पास डीडीए कार्यालय के नजदीक से ऊपर गुजरेगा और फिर वसंत कुंज के बी और सी ब्लॉक (बी-10 मार्केट) के चौराहे को पार करते हुए एम्बियंस मॉल के पास समाप्त होगा. इससे वसंत कुंज, छतरपुर और आसपास के इलाकों से एयरपोर्ट, द्वारका और गुरुग्राम की ओर जाने वाले ट्रैफिक को नया, तेज मार्ग मिलेगा।
इस परियोजना के साथ दिल्ली की एक और बड़ी सड़क कड़ी को जोड़ने की तैयारी चल रही है. अधिकारियों के अनुसार, AIIMS से नेल्सन मंडेला रोड तक छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना भी अंतिम रूप में है. यह कॉरिडोर उस स्थान से शुरू होगा जहां बारापुला एलिवेटेड रोड समाप्त होती है. यदि यह योजना भी समय पर मंजूर होती है, तो गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले यात्रियों को AIIMS, सराय काले खां और पूर्वी दिल्ली तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी. अधिकारियों का कहना है कि AIIMS से नेल्सन मंडेला रोड तक के एलाइनमेंट को जल्द अंतिम रूप देकर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
परियोजना में ट्रैफिक के विभिन्न दिशाओं से आने-जाने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त संरचनाएं भी शामिल की गई हैं. इसके तहत छतरपुर से महिपालपुर की ओर आने वाले ट्रैफिक के लिए मौजूदा दो लेन के एलिवेटेड हिस्से के समानांतर दो लेन का नया फ्लाईओवर बनाया जाएगा. इसके अलावा टनल से बाहर निकलकर छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न भी प्रस्तावित है. इससे अलग-अलग दिशाओं में ट्रैफिक का दबाव बांटा जा सकेगा और चौराहों पर रुकावट कम होगी. यह प्रोजेक्ट हर दिशा से आने वाले ट्रैफिक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. इसका उद्देश्य आने वाले कई दशकों तक इस पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना है. AIIMS लिंक समेत प्रस्तावित सड़क नेटवर्क टनल परियोजना के पूरा होने तक तैयार होने की उम्मीद है।











