
झज्जर.
हर साल 23 जून को जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाती है, तो झज्जर जिले में इस दिन के मायने कुछ अलग ही नजर आते हैं। झज्जर की हवाओं में केवल फसलों की महक नहीं, बल्कि अखाड़ों की मिट्टी और पसीने की वह सोंधी खुशबू भी घुली है, जिसने देश को कई ओलिंपिक पदक विजेता दिए हैं।
झज्जर जिला हरियाणा में कुश्ती के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। जिले में 50 से अधिक निजी और पंजीकृत अखाड़े संचालित हो रहे हैं, जहां पर वर्तमान में 3,000 से अधिक युवा पहलवान सुबह और शाम के सत्रों में कड़ा अभ्यास करते हैं। झज्जर के छारा, खुड्डन, बिरोहड़ और गोरिया जैसे गांवों ने देश को ऐसे नायाब हीरे दिए हैं। छारा गांव की बात करें तो अकेले इस गांव में 5 सक्रिय अखाड़े हैं। यहां का ''लाला दीवान चंद माडर्न कुश्ती एवं योग केंद्र'' देश भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिसने बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलवान देश को दिए हैं। इन अखाड़ों में हरियाणा के ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र तक के युवा आकर ओलंपिक पदक जीतने का सपना संजोए मिट्टी और मैट पर खुद को तपा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाले सितारों की गौरवगाथा –
मनु भाकर: निशानेबाजी की दुनिया में रचा इतिहास
गांव: गोरिया, जिला झज्जर
खेल: निशानेबाजी (10 मीटर एयर पिस्टल)
प्रमुख उपलब्धि:
पेरिस ओलिंपिक 2024 में दो कांस्य पदक (एकल और मिश्रित टीम) जीतकर एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
सफलता की कहानी: झज्जर के गोरिया गांव में जन्मी मनु भाकर की कहानी असाधारण एकाग्रता की मिसाल है। उनके पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर हैं, जिन्होंने मनु की प्रतिभा को पहचाना और उनके खेल के लिए शुरुआती निवेश किया। मनु ने निशानेबाजी से पहले कराटे, स्केटिंग, टेनिस और मुक्केबाजी में भी हाथ आजमाया था, लेकिन 14 साल की उम्र में उन्होंने पूरी तरह शूटिंग को अपना लिया। टोक्यो ओलिंपिक में पिस्टल खराब होने के कारण लगे बड़े झटके के बाद मनु टूटी नहीं, बल्कि अपने गुरु जसपाल राणा के मार्गदर्शन में रोजाना 12 से 16 घंटे अभ्यास किया। कड़ी तपस्या का परिणाम रहा कि पेरिस के मंच पर उन्होंने दो बार तिरंगा ऊंचा कर झज्जर और पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया।
अमन सहरावत: दुखों के पहाड़ को चीरकर बने सबसे युवा पदक विजेता
गांव: बिरोहड़, जिला झज्जर
खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (57 किलोग्राम भार वर्ग)
प्रमुख उपलब्धि: पेरिस ओलिंपिक 2024 में कांस्य पदक विजेता, व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी (21 वर्ष 24 दिन)।
सफलता की कहानी: अमन सहरावत का जीवन संघर्ष किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में अमन ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। इस भयानक पारिवारिक त्रासदी के बाद वह गहरे अवसाद और तनाव से जूझे, लेकिन उनके दादा मांगेराम और चाचाओं ने उन्हें संभाला।
अमन ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार की देखरेख में अपनी कुश्ती को धार दी। गति और आक्रामक खेल शैली के धनी अमन ने साल 2022 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था।
ओलिंपिक में देश के शीर्ष पहलवान रवि दहिया को ट्रायल्स में हराकर जगह बनाने वाले अमन ने पेरिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वह आज झज्जर के हर उस बच्चे के लिए रोल माडल हैं जो अभावों में जी रहा है।
बजंरग पूनिया: मिट्टी से उठकर विश्व स्तर पर धाक जमाने वाले पहलवान
गांव: खुड्डन, जिला झज्जर
खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (65 किलोग्राम भार वर्ग)
प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 में कांस्य पदक विजेता, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 4 पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान।
सफलता की कहानी: खुड्डन गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे बजरंग पूनिया के पास बचपन में महंगे खेल उपकरणों के लिए पैसे नहीं थे। उनके पिता बलवान सिंह स्वयं पहलवान थे, जिन्होंने बजरंग को 7 साल की उम्र में स्थानीय मिट्टी के अखाड़े में उतारा। बजरंग की खुराक और दूध-बादाम का खर्च पूरा करने के लिए उनके पिता बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करते थे। बजरंग ने छारा गांव के वीरेंद्र आर्य के अखाड़े से शुरुआत की और बाद में ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त को अपना मेंटर माना। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग ने टोक्यो ओलंपिक में घुटने की चोट के बावजूद देश को कांस्य पदक दिलाकर अपनी वीरता का परिचय दिया था।
दीपक पूनिया: ओलंपिक पदक के बेहद करीब पहुंचने वाले जांबाज
गांव: छारा, जिला झज्जर
खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (86 किलोग्राम भार वर्ग)
प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलंपिक 2020 में चौथे स्थान पर रहे, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में स्वर्ण पदक विजेता।
सुमित नागल: भारतीय टेनिस के नए सिरमौर
गांव: जैतपुर, जिला झज्जर
खेल: टेनिस (पुरुष एकल)
प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, एटीपी चैलेंजर खिताब विजेता और देश के नंबर-1 एकल टेनिस खिलाड़ी।
दो बार के ओलिंपियन सुमित नागल ने विश्व रैंकिंग के शीर्ष 70 खिलाड़ियों में जगह बनाकर यह तक साबित किया कि हरियाणा की माटी टेनिस जैसे खेल में भी वैश्विक स्तर पर कमाल कर सकती है।
दीक्षा डागर: बाधाओं को पार कर गोल्फ कोर्स पर रची इबारत
मूल संबंध: गांव छप्पार
खेल: गोल्फ
प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, डेफलिंपिक (मूक-बधिर ओलंपिक) में दो बार की स्वर्ण पदक विजेता।
– यह यात्रा दर्शाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी आपकी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।
राहुल रोहिल्ला: बहादुरगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले है।
20 किलोमीटर रेस वाक (पैदल चाल) में टोक्यो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुजीत मान पहलवान, सिदिपुर लोवा भी ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।











