
नई दिल्ली/चंडीगढ़.
पंजाब में भूजल स्तर को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के ताजा आंकड़ों ने मिली-जुली तस्वीर पेश की है। पिछले दस वर्षों के दौरान राज्य में निगरानी किए गए करीब 57 प्रतिशत कुओं में भूजल स्तर बढ़ा है, जबकि 43 प्रतिशत कुओं में गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी सोमवार को जल शक्ति मंत्रालय ने संसद में साझा की।
मंत्रालय के अनुसार जिन इलाकों में जलस्तर बढ़ा है, वहां ज्यादातर मामलों में बढ़ोतरी 0 से 2 मीटर के बीच दर्ज की गई है। यह आंकड़े CGWB द्वारा भूजल स्तर में दीर्घकालिक उतार-चढ़ाव का आकलन करने के लिए एकत्र किए गए थे। राज्यसभा में सांसद संत बलबीर सिंह के सवाल के जवाब में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर गिरने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई, सिंचाई के अक्षम तरीके और क्षेत्र विशेष की भू-वैज्ञानिक परिस्थितियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर-पश्चिमी राज्यों, खासकर पंजाब में, सालाना पुनर्भरण क्षमता से अधिक भूजल निकासी के कारण जल स्तर पर दबाव बढ़ा है।
हालांकि मंत्री ने यह भी बताया कि भूजल की पूर्ति कई प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों से होती रहती है। इनमें बारिश, सिंचाई से लौटने वाला पानी, नहरों का रिसाव और सतही जल स्रोतों से होने वाला रिचार्ज शामिल है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पानी राज्य का विषय है, इसलिए इसके संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े अधिकतर कदम राज्य सरकारें ही योजना बनाकर लागू करती हैं। केंद्र सरकार इन प्रयासों को तकनीकी सहयोग और आंशिक वित्तीय सहायता देकर मजबूत करती है। भूजल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम (NAQUIM) शुरू किया है। इसके तहत पंजाब में 50,369 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया गया है और तैयार किए गए एक्विफर मैप तथा प्रबंधन योजनाएं राज्य एजेंसियों को सौंप दी गई हैं। इसके अलावा NAQUIM 2.0 के तहत लुधियाना और संगरूर जिलों के उन क्षेत्रों में विशेष अध्ययन किया गया है जहां पानी की गुणवत्ता खराब है या भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इसका उद्देश्य भूजल प्रबंधन के लिए अधिक सटीक वैज्ञानिक जानकारी जुटाना है।
पंजाब में भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के लिए 45,592 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हुए कृत्रिम रिचार्ज की मास्टर प्लान भी तैयार की गई है और इसे राज्य सरकार के साथ साझा किया गया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भूजल के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक मॉडल कानून राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है। अब तक पंजाब सहित 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपनाकर लागू कर दिया है। इसके साथ ही CGWB समय-समय पर भूजल संरक्षण, प्रदूषण रोकने और दूषित पानी के सुरक्षित उपयोग को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित करता है। पंजाब में अब तक 41 जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 6,000 से अधिक लोग शामिल हुए। भूजल की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत करने के लिए CGWB ने नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी लागू किया है। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में अधिक बार और घनी सैंपलिंग की जा रही है। जून 2024 से रासायनिक परीक्षणों के नतीजे हर पखवाड़े राज्य सरकार के साथ साझा किए जा रहे हैं।











