6 साल में 1% मजदूरों को नहीं मिला 100 दिन का काम; कोविड में हटाए गए 10 लाख परिवारों के नाम, विधानसभा में जवाब आया

भोपाल
प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला।
विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका।
150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा
मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया।
जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा।
मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं
विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं।
जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला
प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है।
ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा
| साल | पंजीकृत मजदूर | 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार |
| 2021 | 1,70,19,681 | 1,23,624 |
| 2022 | 1,81,42,207 | 63,898 |
| 2023 | 1,69,07,207 | 40,588 |
| 2024 | 1,70,42,207 | 30,420 |
| 2025 | 1,86,57,080 | 32,560 |
150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा
मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही।
जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार):
- 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार
- 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार
- अलीराजपुर — 112 परिवार
- छिंदवाड़ा — 28 परिवार
- धार — 21 परिवार
- मंडला — 17 परिवार
- दमोह — 16 परिवार
- झाबुआ — शून्य
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए।
कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए।
वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम
- 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक
- 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक
- 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक
- 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक
- 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक
रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर
आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई।
विपक्ष का आरोप
कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मजदूरी की मांग भी रही ऊंची
| वर्ष | परिवार | श्रमिक |
| 2021-22 | 61,66,780 | 1,21,95,233 |
| 2022-23 | 53,13,454 | 92,99,519 |
| 2023-24 | 46,99,747 | 76,31,549 |
| 2024-25 | 44,79,776 | 69,86,086 |
| 2025-26 | 42,64,414 | 65,47,787 |











