
फतेहाबाद.
सिंचाई विभाग की खाली भूमि पर रोपे गए 15 हजार से अधिक पौधों से फतेहाबाद में विभागीय परिसरों का तापमान बाहर की तुलना में लगभग 4 डिग्री तक कम दर्ज हो रहा है। सघन हरियाली से विकसित यह क्षेत्र अब प्रदेश स्तर पर मॉडल बन गया है।
विभाग ने निर्णय लिया है कि नहरों के किनारे और सिंचाई परिसरों की खाली पड़ी भूमि पर इसी तर्ज पर प्रदेशभर में वनीकरण किया जाएगा।
इसके लिए मुख्यालय से सभी जिलों से उपलब्ध भूमि का विवरण मांगा गया है। इसके बाद खाली सरकारी भूमि पर ये ग्रीन कॉरिडोर बनेगा। इस मॉडल को समझने के लिए आपको बता दें कि फतेहाबाद के भूथनकलां, दरियापुर, चिम्मो, चांदपुरा और बलियावाला स्थित विश्राम गृहों, टोहाना नहर कॉलोनी तथा एसई आवास परिसर में पूर्व में बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था।
तब यहां रोपे गए आम, नीम, जामुन, अनार, किन्नू, अंजीर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे अब विकसित वृक्ष बन चुके हैं। इसी का परिणाम है कि अब यहां हरियाली घनी होने से परिसर अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं और पक्षियों की संख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है।
पौधारोपण बनी परंपरा
सिंचाई विभाग में पौधारोपण को नियमित गतिविधि का रूप दिया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के जन्मदिन तथा सेवानिवृत्ति जैसे अवसरों पर परिसर में पौधे लगाए जाते हैं।
- नहर किनारे खाली पड़ी सिंचाई विभाग की भूमि पर अब प्रदेशभर में चरणबद्ध वनीकरण लागू होगा।
- फतेहाबाद में विकसित हरित क्षेत्र अब प्रदेश स्तरीय मॉडल के रूप में अपनाया गया है, चलेगा अभियान।
- सघन वृक्षारोपण से विभागीय परिसर छायादार क्षेत्र में बदले और पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई।
- नहर पट्टियों पर योजनाबद्ध पौधारोपण को अतिक्रमण नियंत्रण रणनीति से भी जोड़ा गया है।
यह प्रयोग अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने सभी जिलों से विभागीय भूमि की रिपोर्ट लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। – ओपी बिश्नोई, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, भिवानी
ये मॉडल कितना अहम होगा इन तथ्यों से जानें
अभी क्या है स्थिति
न्यूनतम वन क्षेत्र वाला राज्य: भारत वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा का वन आवरण इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 1.60% है, जो देश में सबसे कम में से एक है। फतेहाबाद मॉडल जैसे प्रयास इस आंकड़े को सुधारने के लिए अनिवार्य हैं।
वृक्षावरण: वन क्षेत्र के बाहर जो पेड़ों का समूह है, वह लगभग 1,425 वर्ग किलोमीटर (3.22%) हैं। नहरों के किनारे किया जा रहा पौधारोपण इसी श्रेणी को मजबूत करता है।
क्या हासिल करेंगे
20% हरित लक्ष्य: हरियाणा सरकार ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य में राज्य के 20% हिस्से को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया है। फतेहाबाद का ‘सिंचाई विभाग मॉडल’ इसी विजन का जमीनी क्रियान्वयन है।
75:25 का अनुपात: सरकार की हालिया नीतियों के अनुसार, सामुदायिक और सरकारी भूमि पर 75% छायादार और 25% फलदार/औषधीय पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसा कि फतेहाबाद में किया गया (नीम, जामुन, किन्नू आदि)।











